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लिपि:
॥ श्री ॥
श्री खाटू श्याम आरती
आरती · श्री कृष्ण
पाठ
1
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे। निज भक्तन के तुमने, पूरण काज करे॥
2
रत्न जड़ित सिंहासन, सिर पर सुन्दर पाग। तन केसरिया बागा, कुण्डल श्रवण लगे॥
3
गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे। खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥
4
हारे का सहारा, श्याम तुम्हारा नाम। लखदातार दयालु, पूरण करो काम॥
5
श्याम बाबा की आरती, जो कोई नर गावे। कहत भक्तजन, मनवांछित फल पावे॥
अर्थ (हिन्दी)
- हे श्री श्याम बाबा, आपकी जय हो! आपने अपने भक्तों के समस्त कार्य सदा पूर्ण किए हैं।
- रत्नजड़ित सिंहासन पर विराजमान, सिर पर सुन्दर पगड़ी; केसरिया वस्त्र धारण किए तथा कानों में कुण्डल शोभायमान हैं।
- गले में पुष्पों की माला व सिर पर मुकुट धारण किए; खाटू धाम में अनुपम (अद्वितीय) रूप में विराजमान हैं।
- हे श्याम! आपका नाम हारे हुए (निराश) जनों का सहारा है; आप लाखों को देने वाले व दयालु हैं — मेरे कार्य पूर्ण कीजिए।
- श्याम बाबा की यह आरती जो भी भक्त गाता है, वह मनोवांछित फल प्राप्त करता है — ऐसा भक्तजन कहते हैं।
लाभ
- श्रद्धा व विश्वास से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
- निराशा व संकट में आत्मबल व सहारा मिलता है।
- मन में भक्ति, शांति व सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कब करें पाठ
नित्य प्रातः व संध्या · एकादशी व शुक्ल पक्ष में · फाल्गुन मास (खाटू श्याम मेला) में
स्रोत
रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
