समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
6
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
जन्माष्टमी; बिहार पंचमी; नित्य संध्या
उद्देश्य:प्रेम-भक्ति (Loving devotion)शरणागति (Surrender)शांति (Peace)
✓ संपूर्ण
"श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ, कुन्जबिहारी तेरी आरती गाऊँ" वृंदावन के बाँकेबिहारी की प्रचलित आरती है। इसमें टेक और पाँच पद हैं। आरती बाँकेबिहारी को "श्री हरि दास के प्यारे" कहती है — स्वामी हरिदास, जिनसे बाँकेबिहारी की परंपरा जुड़ी है — और अंत में युगल छवि पर बलिहारी जाती है।
FAQ
श्री बाँकेबिहारी आरती — सामान्य प्रश्न
टेक और पाँच पद। द्रिक पंचांग और भक्तिभारत — दोनों में ये सब पद हैं; हर पद "श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ" पर समाप्त होता है।
चौथा पद बाँकेबिहारी को "श्री हरि दास के प्यारे" कहता है — स्वामी हरिदास, जिनसे वृंदावन के बाँकेबिहारी की परंपरा जुड़ी है।
हाँ — "आरती श्री बाँकेबिहारी जी की, श्री हरिदास के प्यारे जी की" भी प्रचलित है। यह पृष्ठ "श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ" वाली आरती का है।
दो प्रकाशित प्रतियों से — द्रिक पंचांग (आधार) और भक्तिभारत। टेक और पाँचों पद दोनों में हैं।
पर्व
