श्री बांके बिहारी आरती

śrī bā̃ke bihārī āratī

Banke Bihari Aarti

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: पारंपरिक बांके बिहारी आरती

उद्भव / पृष्ठभूमि

श्री बांके बिहारी जी श्रीकृष्ण का मनोहर त्रिभंगी (तीन स्थानों से झुका हुआ) स्वरूप हैं, जो वृन्दावन में विराजमान हैं; इनका प्राकट्य स्वामी हरिदास जी की भक्ति से हुआ। यह आरती जन्माष्टमी व नित्य संध्या में गाई जाती है।

आरती (लिरिक्स)

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जय जय बांके बिहारी, गिरिधर श्याम मुरारी। वृन्दावन में विराजे, छवि अति सुखकारी॥

हे बांके बिहारी, गिरिधर, श्याम, मुरारी, आपकी जय हो! वृन्दावन में विराजमान आपकी छवि अति सुखदायी है।

त्रिभंगी छवि मनोहर, मोरमुकुट सिर सोहे। नैन कमल-दल जैसे, त्रिभुवन मन मोहे॥

त्रिभंगी मनोहर छवि वाले, सिर पर मोरमुकुट सुशोभित; कमल की पंखुड़ियों जैसे नेत्र — आप तीनों लोकों के मन को मोह लेते हैं।

हरिदास के प्यारे, ठाकुर मनभावन। बांसुरी अधर सजी, सबके मन-पावन॥

स्वामी हरिदास के प्यारे, मन को भाने वाले ठाकुर; अधरों पर बांसुरी सजी है, जो सबके मन को पावन करती है।

झाँकी अति सुखदाई, पल-पल छवि न्यारी। भक्तन के दुख हरते, बिहारी गिरधारी॥

अति सुखदायी झाँकी, पल-पल बदलती अनुपम छवि; हे बिहारी गिरधारी, आप भक्तों के दुःख हरते हैं।

बांके बिहारी की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। प्रेम-भक्ति रस पावे, श्याम-कृपा पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से बांके बिहारी की यह आरती गाता है, वह प्रेम-भक्ति का रस तथा श्याम (कृष्ण) की कृपा प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे बांके बिहारी, गिरिधर, श्याम, मुरारी, आपकी जय हो! वृन्दावन में विराजमान आपकी छवि अति सुखदायी है।
  2. त्रिभंगी मनोहर छवि वाले, सिर पर मोरमुकुट सुशोभित; कमल की पंखुड़ियों जैसे नेत्र — आप तीनों लोकों के मन को मोह लेते हैं।
  3. स्वामी हरिदास के प्यारे, मन को भाने वाले ठाकुर; अधरों पर बांसुरी सजी है, जो सबके मन को पावन करती है।
  4. अति सुखदायी झाँकी, पल-पल बदलती अनुपम छवि; हे बिहारी गिरधारी, आप भक्तों के दुःख हरते हैं।
  5. जो भक्त श्रद्धा से बांके बिहारी की यह आरती गाता है, वह प्रेम-भक्ति का रस तथा श्याम (कृष्ण) की कृपा प्राप्त करता है।

लाभ

  • प्रेम, भक्ति व मन की प्रसन्नता बढ़ती है।
  • मन शांत होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • श्रीकृष्ण की कृपा व आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

कब करें पाठ

जन्माष्टमी परनित्य संध्या मेंएकादशी व गुरुवार को

पाठ विधि

बांके बिहारी जी के समक्ष तुलसी, पुष्प व माखन-मिश्री का भोग अर्पित करें, दीप जलाकर "जय श्री बांके बिहारी" का स्मरण करते हुए आरती गाएँ और प्रसाद वितरण करें।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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श्री बांके बिहारी आरती — सामान्य प्रश्न

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