ॐ गोविन्दाय नमः

oṃ govindāya namaḥ

Govind Mantra (Om Govindaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
बुधवार, एकादशी व गोवर्धन पूजा
उद्देश्य:भक्ति व प्रेम (Love)समृद्धि (Prosperity)रक्षा (Protection)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ गोविन्दाय नमः श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली का नाम 30 है, जिसका अर्थ है “गायों के पालक कृष्ण को नमस्कार”। परंपरा में यह नाम गोवर्धन धारण के बाद इंद्र द्वारा दिया गया माना जाता है। यह साइट पर मौजूद अष्टादशाक्षर गोपाल मंत्र से भिन्न है।

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (नारद पञ्चरात्र) — नाम 30

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ गोविन्दाय नमः
IASToṃ govindāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री कृष्ण
मूल स्रोतश्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (नारद पञ्चरात्र) — नाम 30
जप संख्या108
मालातुलसी माला
शुभ दिनबुधवार, एकादशी व गोवर्धन पूजा
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

गोविन्द नाम की तीन व्याख्याएँ परंपरा में प्रचलित हैं, और तीनों एक ही कृष्ण-लीला की ओर ले जाती हैं। "गो" का अर्थ गाय है — तब गोविन्द वे हैं जो गायों को पालते व प्रसन्न करते हैं, अर्थात् वृंदावन के गोपाल। "गो" का अर्थ पृथ्वी भी है — तब गोविन्द वे हैं जिन्होंने पृथ्वी का उद्धार किया। और "गो" का अर्थ इंद्रियाँ या वेद-वाणी भी लिया जाता है — तब गोविन्द वे हैं जो इंद्रियों के स्वामी हैं और वेद जिन्हें जानते हैं।

परंपरा में कही जाने वाली कथा के अनुसार यह नाम इंद्र ने दिया था। गोवर्धन धारण के बाद जब इंद्र का अभिमान टूटा, तो उन्होंने कामधेनु सहित आकर कृष्ण का अभिषेक किया और उन्हें "गोविन्द" नाम से पुकारा — गायों व गोलोक के अधिपति। इसी प्रसंग से गोवर्धन पूजा और अन्नकूट की परंपरा जुड़ी है, जो दीपावली के अगले दिन मनाई जाती है।

मंत्र

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ॐ गोविन्दाय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ गोविन्दाय नमः॥

oṃ govindāya namaḥ ||

Om Govindaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "गो" दीर्घ है और "विन्द" में "न्द" संयुक्ताक्षर — इसे "विन-द" की तरह न तोड़ें। "दाय" का "आ" दीर्घ। पूरा रूप "गो-विन्-दाय न-मः"। हिन्दी में यह प्रायः "गोविंदाय" (अनुस्वार सहित) लिखा जाता है; उच्चारण दोनों का एक ही है। कीर्तन में यह नाम लयबद्ध रूप से दोहराया जाता है।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
गोगाय; पृथ्वी; इंद्रियाँ; वेद-वाणी
विन्दप्राप्त करने वाला, प्रसन्न करने वाला
गोविन्दायगायों के पालक / पृथ्वी के उद्धारक (कृष्ण) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. गोविन्द को नमस्कार। जो गायों के पालक व प्रसन्नकर्ता हैं, जिन्होंने पृथ्वी का उद्धार किया और जो इंद्रियों के स्वामी हैं — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे गो-धन, कृषि व समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।
  • अभिमान के शमन का भाव — गोवर्धन प्रसंग से जुड़ा नाम है।
  • कीर्तन व सामूहिक भजन में सर्वाधिक प्रयुक्त कृष्ण नामों में से एक है।
  • गोवर्धन पूजा व अन्नकूट की उपासना में इसका जप विशेष माना जाता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: तुलसी माला

उत्तम समय: प्रातः व संध्या

जप का उत्तम समय

बुधवार व एकादशी कोगोवर्धन पूजा व अन्नकूट परजन्माष्टमी की रात्रि मेंकीर्तन व सामूहिक भजन में

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

कृष्ण की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर तुलसी माला से 108 बार जप करें। गोवर्धन पूजा पर गो-सेवा या गाय को भोजन कराकर जप करना विशेष माना जाता है। यह कीर्तन-प्रधान नाम है, इसलिए परंपरा में इसे अकेले जपने के साथ-साथ सामूहिक स्वर में गाने की भी परंपरा है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराश्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (नारद पञ्चरात्र) — नाम 30 "ॐ गोविन्दाय नमः" · श्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 4 "श्री गोविन्दाय नमः" (drikpanchang) · गोवर्धन धारण व इंद्र-अभिषेक प्रसंग — पारंपरिक पुराण कथा
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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