राधाष्टमी

Radhashtami

अगस्त–सितंबर (जन्माष्टमी के लगभग पंद्रह दिन बाद)

महत्व

राधाष्टमी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है और शास्त्रों में इसे श्रीराधा जी का प्राकट्य दिवस माना गया है।

परंपरा के अनुसार राधा रानी का जन्म बरसाना के निकट यमुना-तट पर स्थित रावल ग्राम में हुआ। ब्रज में इस दिन का उत्सव जन्माष्टमी से कम नहीं होता — बरसाना की ऊँची पहाड़ी पर स्थित गहवर वन की परिक्रमा होती है और पूरे नगर में रात-दिन रौनक रहती है।

एक बात ध्यान देने योग्य है: कृष्ण का अवतरण भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को है और राधा का भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को — दोनों एक ही मास की अष्टमी, लगभग पंद्रह दिन के अंतर पर।

पूजन विधि व परंपरा

  • बरसाना में गहवर वन की परिक्रमा
  • राधा-कृष्ण का अभिषेक व श्रृंगार
  • राधा चालीसा तथा राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का पाठ
  • व्रत व रात्रि जागरण
  • पंजीरी व मिष्ठान्न का भोग

तिथि / पंचांग

तिथिअष्टमी
पक्षशुक्ल
माहभाद्रपद
समय (लगभग)अगस्त–सितंबर (जन्माष्टमी के लगभग पंद्रह दिन बाद)
आराध्यश्री राधा, श्री कृष्ण
स्रोतभाद्रपद शुक्ल अष्टमी को राधा-प्राकट्य तथा रावल ग्राम — ब्रज की प्रचलित परंपरा · बरसाना के गहवर वन की परिक्रमा — ब्रज-केंद्रित हिंदी स्रोत
आज का पंचांग

राधाष्टमी — सामान्य प्रश्न

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