समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
राधाष्टमी, एकादशी व नित्य प्रातः-संध्या
उद्देश्य:प्रेम (Love)भक्ति (Devotion)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण गायत्री मंत्र
राधा गायत्री मंत्र है — "ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि, तन्नो राधा प्रचोदयात्"। अर्थ: हम वृषभानु की पुत्री को जानते हैं और कृष्ण की प्रिया का ध्यान करते हैं; वे राधा हमें प्रेरित करें। परंपरा में इसे 108 बार, प्रातः या संध्या को जपा जाता है।
FAQ
श्री राधा गायत्री मंत्र — सामान्य प्रश्न
सबसे प्रचलित रूप है — "ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि, तन्नो राधा प्रचोदयात्"। अर्थ: हम वृषभानु की पुत्री को जानते हैं, कृष्ण की प्रिया का ध्यान करते हैं; वे राधा हमें प्रेरित करें।
मुख्यतः तीन — प्रचलित रूप (वृषभानुजायै/कृष्णप्रियायै), ऊर्ध्वाम्नाय का रूप (साधनदीपिका में उद्धृत, "श्रीं राधिकायै विद्महे क्लीं वृषभानुजायै धीमहि तन्नो गोपी प्रचोदयात्") और गौरीतन्त्र का रूप ("श्रीराधिकायै विद्महे प्रेमरूपायै धीमहि तन्नो राधा प्रचोदयात्")। तीनों इस पृष्ठ पर स्रोत-सहित दिए गए हैं।
"वृषभानुजायै" सही है। "-आय" पुल्लिंग की चतुर्थी विभक्ति है, जो पुरुष देवता के लिए होती है; राधा जी स्त्रीलिंग हैं, इसलिए "-आयै" चाहिए। कई वेबसाइटों पर पुल्लिंग रूप छपा मिलता है — वह छपाई की भूल है।
हमें इसका कोई शास्त्रीय उद्धरण नहीं मिला। यह अनेक भक्ति-प्रकाशनों में एक-सा छपता है, पर किसी पुराण या तन्त्र का नाम इसके साथ नहीं मिलता। जिन दो रूपों का ग्रंथ-सहित उद्धरण मिलता है, वे पद 2 और 3 में दिए गए हैं।
परंपरा में 108 बार — एक माला — तुलसी की माला से। प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या संध्या का समय उत्तम कहा जाता है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता और शुद्ध उच्चारण का है।
परंपरा में बीजाक्षर-युक्त मंत्र गुरु से लेकर जपे जाते हैं, क्योंकि उनमें उच्चारण और विधि दोनों का महत्व कहा जाता है। बिना दीक्षा के सरल रूप (पद 1) या "राधे राधे" नाम-जाप किया जा सकता है।
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पर्व
