श्री राधा मंत्र

śrī rādhā mantra

Shri Radha Mantra (Naam Jaap, Shadakshar and Ashtakshar)

समय
15 सेकंड (प्रति जप)
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
राधाष्टमी, एकादशी व नित्य
उद्देश्य:प्रेम (Love)भक्ति (Devotion)मन की शांति (Peace)
✓ संपूर्ण नाम जाप

राधा जी का सबसे सरल मंत्र नाम-जाप "राधे राधे" है। शास्त्रीय मंत्रों में षडक्षर "ॐ राधायै स्वाहा" (ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृतिखण्ड 55.6) और अष्टाक्षर "श्रीं रां राधिकायै स्वाहा" (गौरीतन्त्र) मुख्य हैं। नित्य जप 108 बार, तुलसी की माला से किया जाता है।

परिचय

श्री राधा ब्रज की अधिष्ठात्री देवी हैं — पुराणों में उन्हें श्रीकृष्ण की प्राणाधिष्ठात्री शक्ति और प्रेम-भक्ति का सर्वोच्च रूप कहा गया है।

स्रोत: नाम-जाप (ब्रज परंपरा) · षडक्षर — ब्रह्मवैवर्त पुराण · अष्टाक्षर — गौरीतन्त्र व ऊर्ध्वाम्नाय

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री राधा मंत्र
IASTśrī rādhā mantra
प्रकारनाम जाप
देवताश्री राधा
मूल स्रोतनाम-जाप (ब्रज परंपरा) · षडक्षर — ब्रह्मवैवर्त पुराण · अष्टाक्षर — गौरीतन्त्र व ऊर्ध्वाम्नाय
जप संख्या108
मालातुलसी की माला
शुभ दिनराधाष्टमी, एकादशी व नित्य
पाठ समय15 सेकंड (प्रति जप)
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

ब्रज में अभिवादन भी "राधे राधे" है और जप भी — यही राधा-उपासना की सबसे सहज विधि है। इसके लिए न विधि चाहिए, न संकल्प, न माला; चलते-फिरते भी किया जाता है। ब्रजवासी इसे नाम-जाप कहते हैं, और चालीसा भी यही कहती है — "राधा नाम लेइ जो कोई, सहजहि दामोदर बस होई"।

शास्त्रीय मंत्रों में सबसे पुराना उद्धरण ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृतिखण्ड (अध्याय 55) में मिलता है, जहाँ शिव जी पार्वती को बताते हैं कि एक ब्राह्मण ने राजा को षडक्षर राधा-मंत्र दिया। मूल श्लोक मंत्र को खोलकर नहीं, संकेत में देता है — "ॐ राधेति चतुर्थ्यन्तं वह्निजायान्तमेव च" (55.6): ॐ, फिर "राधा" का चतुर्थी रूप (राधायै), फिर "वह्निजाया" यानी स्वाहा। जोड़ने पर बनता है "ॐ राधायै स्वाहा" — और गिनती भी छह अक्षर की बैठती है।

अष्टाक्षर मंत्र दो परंपराओं में दो रूपों में मिलता है — गौरीतन्त्र में "श्रीं रां राधिकायै स्वाहा" और ऊर्ध्वाम्नाय (साधनदीपिका में उद्धृत) में "क्लीं श्रीं राधिकायै स्वाहा"। दोनों आठ अक्षर के हैं; अंतर पहले बीज का है।

इन तांत्रिक स्रोतों में होम-द्रव्य, दिन-गणना और कामना-भेद से प्रयोग की विस्तृत विधि भी दी गई है। वह विधि यहाँ जान-बूझकर नहीं दी गई — यह भक्ति का पृष्ठ है, तांत्रिक प्रयोग-पुस्तिका नहीं। परंपरा में बीजाक्षर-युक्त मंत्र गुरु से लेकर ही जपे जाते हैं।

मंत्र

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राधे राधे

ॐ राधायै स्वाहा

श्रीं रां राधिकायै स्वाहा

क्लीं श्रीं राधिकायै स्वाहा

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उच्चारण (Pronunciation)

राधे राधे

rādhe rādhe

Raadhe raadhe

ॐ राधायै स्वाहा

oṃ rādhāyai svāhā

Om raadhaayai svaahaa

श्रीं रां राधिकायै स्वाहा

śrīṃ rāṃ rādhikāyai svāhā

Shreem raam raadhikaayai svaahaa

क्लीं श्रीं राधिकायै स्वाहा

klīṃ śrīṃ rādhikāyai svāhā

Kleem shreem raadhikaayai svaahaa

उच्चारण मार्गदर्शन: "राधे राधे" में दोनों "धे" बराबर लंबाई के रहें — जल्दबाज़ी में यह "राधेराधे" न बन जाए। "स्वाहा" में "स्वा" संयुक्त है (स् + वा), और अंतिम "हा" दीर्घ। बीजाक्षरों — "श्रीं", "क्लीं", "रां" — का अनुस्वार नासिका से गूँजकर निकले, झटके से नहीं। "राधिकायै" का अंत "यै" है, "या" नहीं।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

राधेहे राधा! (संबोधन)
राधायैराधा जी को (चतुर्थी विभक्ति)
स्वाहायह समर्पित है — आहुति का शब्द
षडक्षरछह अक्षर का मंत्र
अष्टाक्षरआठ अक्षर का मंत्र
श्रींश्री-बीज — शोभा व सम्पन्नता का बीजाक्षर
रांराधा-बीज
वह्निजायाअग्नि की पत्नी — स्वाहा का शास्त्रीय संकेत-नाम

अर्थ (हिन्दी)

  1. राधा जी का नाम-जाप — ब्रज की सबसे सहज उपासना। ब्रज में यही अभिवादन भी है। इसके लिए कोई विधि या दीक्षा नहीं चाहिए।
  2. षडक्षर (छह अक्षर का) राधा-मंत्र — ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृतिखण्ड 55.6। भाव: राधा जी को यह आहुति समर्पित है। "स्वाहा" समर्पण का शब्द है।
  3. अष्टाक्षर (आठ अक्षर का) राधा-मंत्र — गौरीतन्त्र से, गौरगोविन्दार्चन-स्मरणपद्धति में उद्धृत। "श्रीं" श्री-बीज है और "रां" राधा-बीज।
  4. अष्टाक्षर मंत्र का दूसरा रूप — ऊर्ध्वाम्नाय से, साधनदीपिका (षष्ठकक्षा) में उद्धृत। इसमें पहला बीज "क्लीं" है। दोनों रूप आठ ही अक्षर के हैं।

लाभ

  • "राधे राधे" नाम-जाप के लिए न विधि चाहिए, न दीक्षा — चलते-फिरते भी किया जा सकता है।
  • षडक्षर मंत्र का उद्धरण ब्रह्मवैवर्त पुराण में है — राधा-उपासना का सबसे पुराना पुराण-प्रमाण।
  • नित्य जप से मन एकाग्र होता है; परंपरा प्रेम व भक्ति-भाव की वृद्धि कहती है।
  • राधाष्टमी के संकल्प-जप में यही मंत्र लिए जाते हैं।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: तुलसी की माला

उत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त या संध्या

जप का उत्तम समय

नित्य — किसी भी समय, बिना विधि के ("राधे राधे")प्रातः ब्रह्म मुहूर्त व संध्या में माला-जपराधाष्टमी व एकादशी पर संकल्प-सहितब्रज-यात्रा में — बरसाना, वृंदावन, राधाकुंड

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

"राधे राधे" के लिए कोई नियम नहीं — जब मन करे, जितनी बार करें। माला-जप के लिए स्नान कर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें, राधा-कृष्ण का ध्यान करें और तुलसी की माला से 108 बार जपें। बीजाक्षर-युक्त मंत्र (पद 3–4) परंपरा में गुरु से लेकर जपे जाते हैं। एक ही मंत्र चुनकर उसी पर टिके रहना श्रेष्ठ कहा जाता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृतिखण्ड 55.5–6 — षडक्षर राधा-मंत्र (विकिस्रोत का संस्कृत पाठ) · गौरगोविन्दार्चन-स्मरणपद्धति, श्लोक 181 (गौरीतन्त्र से उद्धृत) — "श्रीं रां राधिकायै स्वाहा" · साधनदीपिका, षष्ठकक्षा (श्री-ऊर्ध्वाम्नाय से उद्धृत) — "क्लीं श्रीं राधिकायै स्वाहा" · "राधे राधे" नाम-जाप — ब्रज की जीवित परंपरा; कोई ग्रंथ-उद्धरण नहीं
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

श्री राधा

Shri Radha (Radha Rani)

श्री राधा ब्रज की अधिष्ठात्री देवी हैं — पुराणों में उन्हें श्रीकृष्ण की प्राणाधिष्ठात्री शक्ति और प्रेम-भक्ति का सर्वोच्च रूप कहा गया है।

देवता वर्गप्रेम · भक्ति · कृपा · माधुर्य
मुख्य मंत्रॐ राधायै स्वाहा
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श्री राधा मंत्र — सामान्य प्रश्न

श्री राधा भक्ति संग्रह

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