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लिपि:
॥ श्री ॥
श्री राधा गायत्री मंत्र
मंत्र · श्री राधा
पाठ
1
ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि। तन्नो राधा प्रचोदयात्॥
2
श्रीं राधिकायै विद्महे क्लीं वृषभानुजायै धीमहि। तन्नो गोपी प्रचोदयात्॥
3
श्रीराधिकायै विद्महे प्रेमरूपायै धीमहि। तन्नो राधा प्रचोदयात्॥
अर्थ (हिन्दी)
- हम वृषभानु की पुत्री को जानते हैं और कृष्ण की प्रिया का ध्यान करते हैं; वे राधा हमें (हमारी बुद्धि को) प्रेरित करें। — यह आज का सबसे प्रचलित रूप है; इसका शास्त्रीय उद्धरण नहीं मिलता।
- हम राधिका को जानते हैं और वृषभानु की पुत्री का ध्यान करते हैं; वे गोपी (राधा) हमें प्रेरित करें। — ऊर्ध्वाम्नाय से, साधनदीपिका (षष्ठकक्षा) में उद्धृत। इसमें "श्रीं" और "क्लीं" बीज भी हैं।
- हम श्री राधिका को जानते हैं और प्रेम-स्वरूपा का ध्यान करते हैं; वे राधा हमें प्रेरित करें। — गौरीतन्त्र से, गौरगोविन्दार्चन-स्मरणपद्धति में उद्धृत।
लाभ
- राधा जी का गायत्री-छंद वाला मंत्र — नित्य जप के लिए सबसे छोटा और सरल पाठ।
- प्रेम, भक्ति-भाव और मन की एकाग्रता के भाव से जपा जाता है।
- राधाष्टमी के जप-संकल्प में सबसे अधिक लिया जाने वाला मंत्र।
- तीनों प्रचलित रूप स्रोत-सहित एक जगह — अपनी परंपरा के अनुसार चुन सकते हैं।
कब करें पाठ
नित्य प्रातः व संध्या · राधाष्टमी पर संकल्प-सहित · एकादशी व जन्माष्टमी पर · ब्रज-यात्रा (बरसाना, वृंदावन, राधाकुंड) में
स्रोत
bhartiyasanskaar.com — राधा गायत्री मंत्र (शुद्ध स्त्रीलिंग रूप) · bhajansangrah.in व aartichalisa.com — वही मंत्र (पुल्लिंग विभक्ति के साथ छपा) · साधनदीपिका, षष्ठकक्षा (श्री-ऊर्ध्वाम्नाय से उद्धृत) — विकिस्रोत का संस्कृत पाठ · गौरगोविन्दार्चन-स्मरणपद्धति, श्लोक 181 के बाद (गौरीतन्त्र से उद्धृत) — विकिस्रोत का संस्कृत पाठ
