श्री विट्ठल आरती
पाठ
युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा। वामांगी रखुमाई दिसे दिव्य शोभा। पुंडलिकाचे भेटी परब्रह्म आले गा। चरणी वाहे भीमा उद्धरी जगा॥
जय देव जय देव जय पांडुरंगा। रखुमाईवल्लभा, राईच्या वल्लभा पावे जिवलगा॥
तुळसीमाळा गळा कर ठेवुनी कटी। कासे पीतांबर कस्तुरी लल्लाटी। देव सुरवर नित्य येती भेटी। गरुड हनुमंत पुढे उभे रहाती॥
धन्य वेणूनाद अनुक्षेत्रपाळा। सुवर्णाची कमळे वनमाळा गळा। राई रखुमाबाई राणीया सकळा। ओवाळिती राजा विठोबा सावळा॥
ओवाळू आरत्या कुर्वंड्या येती। चंद्रभागेमाजी सोडुनिया देती। दिंड्या पताका वैष्णव नाचती। पंढरीचा महिमा वर्णावा किती॥
आषाढी कार्तिकी भक्तजन येती। चंद्रभागेमध्ये स्नान जे करिती। दर्शनहेळामात्रे तया होय मुक्ति। केशवासी नामदेव भावे ओवाळिती॥
अर्थ (हिन्दी)
- अट्ठाईस युगों से (विट्ठल) ईंट पर खड़े हैं; बाईं ओर रखुमाई (रुक्मिणी) हैं — दिव्य शोभा दिखती है; पुंडलिक से मिलने परब्रह्म आए, और उनके चरणों में बहती भीमा (नदी) जगत का उद्धार करती है।
- (ध्रुवपद) हे देव, हे पांडुरंग, आपकी जय हो! हे रखुमाई के प्रिय, हे राई के प्रिय, हे प्राणप्रिय, कृपा करो।
- गले में तुलसी की माला, हाथ कमर पर रखे हुए; कमर पर पीतांबर, माथे पर कस्तूरी; श्रेष्ठ देवता नित्य मिलने आते हैं, और गरुड़ और हनुमान सामने खड़े रहते हैं।
- हे इस क्षेत्र के पालक, आपकी बाँसुरी की ध्वनि धन्य है; सोने के कमल और गले में वनमाला है; राई, रखुमाबाई और सब रानियाँ साँवले राजा विठोबा की आरती उतारती हैं।
- हम आरतियाँ उतारते हैं, कुर्वंड्या आती हैं और उन्हें चंद्रभागा में छोड़ दिया जाता है; दिंडियाँ, पताकाएँ और वैष्णव नाचते हैं — पंढरी की महिमा कितनी वर्णन करें!
- आषाढ़ी और कार्तिकी (एकादशी) पर भक्तजन आते हैं और चंद्रभागा में स्नान करते हैं; दर्शन की एक झलक मात्र से उन्हें मुक्ति मिल जाती है — नामदेव भाव से केशव की आरती उतारते हैं।
लाभ
- विट्ठल-भक्ति और वारकरी परंपरा का पाठ।
- दर्शन की महिमा — "दर्शनहेळामात्रे तया होय मुक्ति"।
- आषाढ़ी और कार्तिकी एकादशी पर गाई जाने वाली आरती।
कब करें पाठ
आषाढ़ी एकादशी और कार्तिकी एकादशी पर · नित्य संध्या आरती में · वारी और भजन-संध्या में
स्रोत
रचयिता: संत नामदेव (अंतिम पद की छाप). shabdyatri.com — विठ्ठलाची आरती, संत नामदेव महाराज (आधार-पाठ) · marathimindset.com — विठ्ठलाची आरती - युगे अठ्ठावीस विटेवरी उभा
