समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
बुधवार व जन्माष्टमी
उद्देश्य:प्रेम (Love)भक्ति (Devotion)आकर्षण (Attraction)
✓ संपूर्ण बीज मंत्र
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः भगवान कृष्ण का बीज मंत्र है — इसमें "क्लीं" बीजाक्षर है, और अर्थ है "भगवान कृष्ण को नमस्कार"। इसे प्रेम और भक्ति के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार, विशेषकर जन्माष्टमी पर। द्रिक पंचांग की कृष्ण मंत्र-सूची में भी यह मंत्र है।
FAQ
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः — सामान्य प्रश्न
"क्लीं" कामबीज है जो प्रेम, आकर्षण व मधुर भक्ति का प्रतीक है और कृष्ण-कृपा को आकर्षित करता है।
यह कृष्ण-भक्ति, प्रेम व सम्बन्धों में सौहार्द बढ़ाने हेतु लाभकारी माना जाता है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए तुलसी माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः, संध्या व बुधवार है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है।
मंत्र के पदों का अर्थ इस प्रकार है — ॐ — प्रणव — परब्रह्म का प्रतीक; क्लीं — कामबीज — प्रेम व आकर्षण का बीजाक्षर; कृष्णाय — कृष्ण को; नमः — नमस्कार। पूरे मंत्र का भाव यह है: भगवान कृष्ण को नमस्कार। "क्लीं" कामबीज है जो प्रेम, आकर्षण व मधुर भक्ति का प्रतीक है तथा कृष्ण की कृपा को आकर्षित करता है।
यह बीज मंत्र है, सामान्य नाम-जप नहीं। परंपरा में इस श्रेणी के मंत्रों के लिए गुरु-दीक्षा को श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि इनमें उच्चारण, संख्या तथा नियम का विशेष विधान बताया जाता है। जिन्हें दीक्षा प्राप्त न हो, उनके लिए परंपरा इष्ट के नाम-जप, स्तुति व आरती का मार्ग सुझाती है — वह सर्वथा खुला कहा गया है।
"क्लीं" को दीर्घ ई व अनुस्वार सहित ("क्लीम्") नासिक्य ध्वनि में बोलें, फिर "कृष्-णाय" व "न-मः"। मधुर व भावपूर्ण स्वर में दोहराएँ। परंपरा में मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व कहा जाता है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
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