कृष्ण गायत्री मंत्र

kṛṣṇa gāyatrī mantra

Krishna Gayatri Mantra

समय
40 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
बुधवार व जन्माष्टमी
उद्देश्य:भक्ति (Devotion)प्रेम (Love)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: पारंपरिक कृष्ण गायत्री (गायत्री छंद)

मंत्र

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ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्॥

oṃ devakīnandanāya vidmahe vāsudevāya dhīmahi | tanno kṛṣṇaḥ pracodayāt ||

Om Devaki-nandanaya Vidmahe Vasudevaya Dhimahi, Tanno Krishnah Prachodayat.

उच्चारण मार्गदर्शन: "देवकी-नन्दनाय", "विद्-म-हे", "वा-सु-देवाय", "धी-म-हि" स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ; "प्रचोदयात्" का "त्" हल्का हलन्त।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

देवकीनन्दनायदेवकी के पुत्र (कृष्ण) को
विद्महेहम जानते हैं
वासुदेवायवसुदेव-पुत्र वासुदेव को
धीमहिहम ध्यान करते हैं
तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्वे कृष्ण हमारी बुद्धि को प्रेरित करें

अर्थ (हिन्दी)

  1. हम देवकीनन्दन को जानते हैं और वासुदेव का ध्यान करते हैं; वे कृष्ण हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

लाभ

  • कृष्ण-भक्ति व प्रेम में वृद्धि होती है।
  • मन शांत होकर एकाग्रता बढ़ती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति व सकारात्मकता आती है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: तुलसी माला

उत्तम समय: प्रातः, संध्या व बुधवार

जप का उत्तम समय

प्रातः व संध्याबुधवार व जन्माष्टमी कोनित्य जप हेतु

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

कृष्ण जी के समक्ष तुलसी अर्पित कर तुलसी माला से 108 बार जप करें। बुधवार व जन्माष्टमी को जप विशेष फलदायी होता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक कृष्ण गायत्री परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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कृष्ण गायत्री मंत्र — सामान्य प्रश्न

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