kṛṣṇa gāyatrī mantra
Krishna Gayatri Mantra
श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।
स्रोत: पारंपरिक कृष्ण गायत्री (गायत्री छंद)
ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्॥
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oṃ devakīnandanāya vidmahe vāsudevāya dhīmahi | tanno kṛṣṇaḥ pracodayāt ||
Om Devaki-nandanaya Vidmahe Vasudevaya Dhimahi, Tanno Krishnah Prachodayat.
उच्चारण मार्गदर्शन: "देवकी-नन्दनाय", "विद्-म-हे", "वा-सु-देवाय", "धी-म-हि" स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ; "प्रचोदयात्" का "त्" हल्का हलन्त।
जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।
माला: तुलसी माला
उत्तम समय: प्रातः, संध्या व बुधवार
कृष्ण जी के समक्ष तुलसी अर्पित कर तुलसी माला से 108 बार जप करें। बुधवार व जन्माष्टमी को जप विशेष फलदायी होता है।
Lord Krishna
मंत्र
आरती
चालीसा
अष्टमी
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