समय
8–10 मिनट
श्लोक/चौपाई
41
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
एकादशी, फाल्गुन मेला व नित्य
उद्देश्य:संकट-मोचन (Relief from Troubles)रक्षा (Protection)भक्ति (Devotion)
✓ संपूर्ण (39/39 श्लोक)
श्री खाटू श्याम चालीसा एक दोहे से आरंभ होकर उनतालीस चौपाइयों में चलती है और एक दोहे पर पूर्ण होती है। इसका आरंभ "श्याम-श्याम भजि बारंबारा, सहज ही हो भवसागर पारा" से होता है। चौपाइयाँ बर्बरीक के वंश-क्रम से लेकर खाटू में उनके विराजने तक की कथा कहती हैं।
FAQ
श्री खाटू श्याम चालीसा — सामान्य प्रश्न
नित्य प्रातः-संध्या; और विशेष रूप से प्रत्येक एकादशी को, जो खाटू परंपरा का मुख्य दिन है। वर्ष का सबसे बड़ा अवसर फाल्गुन शुक्ल एकादशी-द्वादशी है, जब खाटू में लक्खी मेला भरता है।
महाभारत के वीर बर्बरीक — घटोत्कच के पुत्र तथा भीम के पौत्र। चालीसा स्वयं यह कहती है: *"भीम सुपुत्र अहिलावाती जाया, कही भीम का पौत्र कहलाया"* (चौपाई 3)। उन्होंने श्रीकृष्ण के माँगने पर शीश दान किया, और कृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में वे उन्हीं के नाम "श्याम" से पूजे जाएँगे। वे स्वयं कृष्ण नहीं हैं — कृष्ण ने उन्हें अपना *नाम* दिया, अपनी पहचान नहीं।
नहीं — कम से कम तीन वाचनाएँ प्रचलित हैं। इस पृष्ठ पर वह दी गई है जिसके दो स्वतंत्र प्रकाशित साक्ष्य मिले — *"श्री गुरु चरणन ध्यान धर… रच चौपाई छंद"*, पहली चौपाई *"श्याम-श्याम भजि बारंबारा"*। दूसरी *"श्री गुरु चरण ध्यान धरि… रचि चालीस छंद"* से आरंभ होती है; तीसरी सीकर वाचना *"श्री गुरु पदरज शीशधर प्रथम सुमिरू गणेश"* से। तीनों प्रामाणिक रूप से प्रचलित हैं।
नाम की शक्ति बताने के लिए चौपाई 20–23 में — तोते को नाम पढ़ाकर तरने वाली गणिका, भीलनी (शबरी) की भक्ति, श्राप से शिला बनी अहल्या, तथा अजामिल और सदन कसाई। अंत में खाटू की महिमा आती है — *"खाटू में हैं मथुरावासी, पारब्रह्म पूर्ण अविनाशी"* (35)।
चूरमा सबसे प्रचलित है; साथ ही पंजीरी, खीर, मोदक तथा मिश्री। खाटू श्याम आरती का चौथा पद स्वयं कहता है — *"मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे"*। अर्पण में केसरिया या लाल वस्त्र, पुष्प-माला, मोरछड़ी तथा इत्र विशेष माने जाते हैं।
इसका अर्थ है कि श्याम बाबा हारे हुए व निराश जनों का सहारा बनते हैं। इसका मूल कथा में है — बर्बरीक ने अपनी माता को वचन दिया था कि वे युद्ध में सदा हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ेंगे। चालीसा भी यही भाव कहती है — *"श्याम भक्त न कहीं पर हारा, भीर परी तब श्याम पुकारा"* (29)।
नहीं — और यह भ्रम आम है। जन्माष्टमी श्रीकृष्ण का पर्व है। खाटू श्याम बर्बरीक हैं, कृष्ण नहीं — इसलिए उनका दिन एकादशी है, और सबसे बड़ा अवसर फाल्गुन शुक्ल एकादशी-द्वादशी का लक्खी मेला।
वेबदुनिया और हिन्दूनिधि — दो स्वतंत्र प्रकाशित स्रोतों से। दोनों का पाठ एक ही है; अंतर केवल पृष्ठ-सज्जा का है। सितंबर 2026 में यह पाठ बदला गया, क्योंकि पहले वाले पाठ की चौपाइयाँ किसी प्रकाशित वाचना से मेल नहीं खाती थीं।
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पर्व
