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॥ श्री ॥

श्री खाटू श्याम चालीसा

चालीसा · श्री कृष्ण

पाठ

श्री गुरु चरण ध्यान धरि, सुमिरि सच्चिदानंद। श्याम चालीसा भणत हूँ, रचि चालीस छंद॥

1

जय जय श्री श्याम बाबा प्यारे। हारे का तुम सहारा हमारे॥

2

बर्बरीक नाम जग में पाया। भीम-पौत्र तुम कहलाया॥

3

तीन बाण के तुम अधिकारी। वीरता तुम्हरी जग से न्यारी॥

4

माँ को वचन दिया तुम भारी। हारे का दूँगा साथ हितकारी॥

5

कृष्ण परीक्षा लीन्ही तेरी। शीश-दान की माँग की फेरी॥

6

बिना हिचक तुम शीश चढ़ाया। त्याग-दान जग को सिखलाया॥

7

कृष्ण प्रसन्न हुए तब भारी। वर दीन्हा तुम जग-हितकारी॥

8

कलियुग में मम नाम से पूजे। श्याम रूप जग तुमको भजे॥

9

खाटू नगरी धाम तुम्हारा। भक्त-गण नित दरस को धारा॥

10

शीश दबा जहँ प्रगट हुआ है। खाटू धाम वहीं बना है॥

11

निज भक्तन के काज सँवारे। हारे-थके को तुरत उबारे॥

12

लखदातार दयालु कहाते। निज जन की हर पीर मिटाते॥

13

जो जन तुमको नित ही ध्यावै। मन-इच्छित फल सहज वह पावै॥

14

शत्रु-संकट सब टारन हारे। भक्तन के तुम सदा सहारे॥

15

मोर-मुकुट सिर शोभा पावै। केसरिया बागा मन भावै॥

16

गल पुष्पों की माला सोहे। रूप निरख भक्तन मन मोहे॥

17

चूरमा-पंजीरी भोग लगावैं। श्रद्धा से जन तुम्हें मनावैं॥

18

ता पर बाबा प्रसन्न हो जावैं। मनवांछित फल तुरत दिलावैं॥

19

फाल्गुन में मेला भरता है। लक्खी भीड़ दर्शन करता है॥

20

निशान-पताका भक्त चढ़ावैं। पैदल चल कर दरस को आवैं॥

21

जो नर श्रद्धा से तुम्हें ध्यावै। रोग-शोक भय निकट न आवै॥

22

दीन-दुखी की सुनत पुकारा। पल में करते बेड़ा पारा॥

23

रोग-दोष सब दूर भगाते। सुख-समृद्धि घर में लाते॥

24

जो जन तुमको शीश नवावै। भय-संकट से मुक्ति पावै॥

25

साहस-बल तुम भक्तन देते। निराशा में आशा भर देते॥

26

जो नर निशदिन ध्यान लगावै। श्याम-कृपा सहज वह पावै॥

27

मंगल-कारी विघ्न-विनाशन। भय-हारी तुम सुख-साधन॥

28

जो श्रद्धा से भोग चढ़ावै। ता के सब बिगड़े बन जावै॥

29

जो यह श्याम चालीसा गावै। भय-संकट सब दूर नसावै॥

30

नित प्रति पाठ करे जो कोई। ता पर कृपा श्याम की होई॥

31

मन-इच्छित फल सब जन पावैं। सुख-समृद्धि घर में लावैं॥

32

श्याम-कृपा जिन पर होई। ता को कष्ट सतावे न कोई॥

33

हारे को तुम जिता देते हो। गिरते को तुम थमा लेते हो॥

34

श्याम-धणी का जयकारा गूँजे। जग में तुम सम कोउ न दूजे॥

35

जो सत भाव करे यह सेवा। रीझत तुरत श्याम-धन देवा॥

36

संकट-मोचन नाम तुम्हारा। भक्त-हृदय में नित्य निवारा॥

37

घर-घर ज्योति तुम्हारी जागै। नर-नारी सब तुमको पागै॥

38

श्याम-वंदन जो जन गावै। इहलोक-परलोक सुख पावै॥

39

जो जन श्याम गुण गावै। पाप-ताप सब दूर भगावै॥

40

जय जय जय श्री श्याम मुरारी। रक्षा करो प्रभु शरण हमारी॥

श्याम चालीसा जो पढ़े, प्रेम सहित मन लाय। हारे का सहारा बने, श्याम-कृपा बरसाय॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. श्री गुरु के चरणों का ध्यान धरकर व सच्चिदानंद का स्मरण कर, मैं चालीस छंदों में श्याम चालीसा कहता हूँ।
  2. हे प्यारे श्री श्याम बाबा, आपकी जय हो; आप हमारे (हारे हुए जनों के) सहारे हैं।
  3. आपने जगत में बर्बरीक नाम पाया; आप भीम के पौत्र कहलाए।
  4. आप तीन बाणों के अधिकारी थे; आपकी वीरता जगत से निराली थी।
  5. आपने माता को बड़ा वचन दिया कि "मैं हारने वाले (दुर्बल) पक्ष का साथ दूँगा।"
  6. श्रीकृष्ण ने आपकी परीक्षा ली और (ब्राह्मण रूप में) शीश-दान की माँग की।
  7. आपने बिना हिचक अपना शीश अर्पित कर दिया और जगत को त्याग व दान सिखाया।
  8. तब श्रीकृष्ण अत्यंत प्रसन्न हुए और आपको जगत-हितकारी वर दिया।
  9. (कृष्ण ने कहा —) "कलियुग में तुम मेरे श्याम नाम से पूजे जाओगे"; अतः जगत आपको श्याम रूप में भजता है।
  10. खाटू नगरी आपका धाम है; भक्तगण नित्य दर्शन की लालसा रखते हैं।
  11. जहाँ आपका शीश दबा प्रकट हुआ, वहीं खाटू धाम (मंदिर) बना है।
  12. आप अपने भक्तों के काज सँवारते हैं और हारे-थके जनों को तुरंत उबार लेते हैं।
  13. आप लखदातार व दयालु कहलाते हैं; अपने भक्तों की हर पीड़ा मिटाते हैं।
  14. जो जन नित्य आपका ध्यान करता है, वह सहज ही मन-इच्छित फल पाता है।
  15. आप शत्रु व संकट सब दूर करने वाले हैं; आप भक्तों के सदा सहारे हैं।
  16. सिर पर मोर-मुकुट शोभा पाता है और केसरिया वस्त्र (बागा) मन को भाता है।
  17. गले में पुष्पों की माला सुशोभित है; आपका रूप निरखकर भक्तों का मन मोहित होता है।
  18. भक्त चूरमा व पंजीरी का भोग लगाते हैं और श्रद्धा से आपको मनाते हैं।
  19. उस पर बाबा प्रसन्न हो जाते हैं और तुरंत मनोवांछित फल दिलाते हैं।
  20. फाल्गुन मास में (खाटू धाम का) विशाल मेला भरता है, जहाँ लाखों की भीड़ दर्शन करती है।
  21. भक्त निशान-पताका चढ़ाते हैं और पैदल चलकर दर्शन को आते हैं।
  22. जो मनुष्य श्रद्धा से आपका ध्यान करता है, उसके निकट रोग, शोक व भय नहीं आते।
  23. आप दीन-दुखियों की पुकार सुनते ही पल भर में उनका बेड़ा पार कर देते हैं।
  24. आप समस्त रोग-दोष दूर भगाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
  25. जो जन आपको शीश नवाता है, वह भय व संकट से मुक्ति पाता है।
  26. आप भक्तों को साहस व बल देते हैं और निराशा में आशा भर देते हैं।
  27. जो मनुष्य दिन-रात ध्यान लगाता है, वह सहज ही श्याम-कृपा प्राप्त करता है।
  28. आप मंगलकारी व विघ्नों के विनाशक हैं; भय हरकर सुख देने वाले हैं।
  29. जो श्रद्धा से भोग चढ़ाता है, उसके सब बिगड़े कार्य बन जाते हैं।
  30. जो यह श्याम चालीसा गाता है, उसके भय व संकट सब दूर नष्ट हो जाते हैं।
  31. जो कोई नित्य पाठ करता है, उस पर श्याम बाबा की कृपा होती है।
  32. सब जन मन-इच्छित फल पाते हैं और घर में सुख-समृद्धि लाते हैं।
  33. जिन पर श्याम बाबा की कृपा होती है, उन्हें कोई कष्ट नहीं सताता।
  34. आप हारे हुए को जिता देते हैं और गिरते हुए को थाम लेते हैं।
  35. "श्याम-धणी" का जयकारा गूँजता है; जगत में आपके समान दूसरा कोई नहीं।
  36. जो सच्चे भाव से यह सेवा करता है, उस पर श्याम-धनी देव तुरंत रीझ (प्रसन्न हो) जाते हैं।
  37. आपका नाम संकट-मोचन है; आप भक्तों के हृदय में नित्य निवास कर कष्ट दूर करते हैं।
  38. घर-घर में आपकी ज्योति जगती है; नर-नारी सब आपमें अनुरक्त हो जाते हैं।
  39. जो जन श्याम-वंदना गाता है, वह इस लोक व परलोक दोनों में सुख पाता है।
  40. जो जन श्याम बाबा के गुण गाता है, वह समस्त पाप-ताप दूर भगा देता है।
  41. हे श्री श्याम मुरारी, आपकी जय हो; हे प्रभु, शरण में आए हम सबकी रक्षा कीजिए।
  42. जो प्रेमपूर्वक मन लगाकर श्याम चालीसा पढ़ता है, श्याम बाबा उसके सहारे बनते हैं और उस पर कृपा बरसाते हैं।

लाभ

  • श्रद्धा व विश्वास से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
  • निराशा व संकट में आत्मबल व सहारा मिलता है।
  • भय, बाधा व शत्रु-संकट का नाश होता है।
  • मन में भक्ति, शांति व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

कब करें पाठ

नित्य प्रातः व संध्या · एकादशी व शुक्ल पक्ष में · फाल्गुन मास (खाटू श्याम मेला) में

स्रोत

रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक खाटू श्याम चालीसा · खाटू धाम (सीकर) परंपरा

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