मधुराष्टकम्

madhurāṣṭakam

Madhurashtakam

समय
3–4 मिनट
श्लोक
8
कठिनाई
सरल (Beginner)
शुभ दिन
बुधवार; जन्माष्टमी
उद्देश्य:प्रेम (Love)भक्ति (Devotion)आनंद (Bliss)
✓ संपूर्ण (8/8 श्लोक)

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: रचयिता: श्री वल्लभाचार्य — संपूर्ण आठ श्लोक

उद्भव / पृष्ठभूमि

मधुराष्टकम् की रचना भक्ति परंपरा के महान आचार्य श्री वल्लभाचार्य ने की थी। आठ श्लोकों का यह स्तोत्र श्री कृष्ण की सम्पूर्ण माधुरी (मधुरता) का गान करता है। प्रत्येक श्लोक "मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्" (मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है) पर समाप्त होता है, जिससे यह अत्यंत सरल व लयबद्ध बन जाता है।

संपूर्ण अष्टकम्

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अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम्। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

उन (कृष्ण) के अधर मधुर हैं, मुख मधुर है, नेत्र मधुर हैं, हँसी मधुर है; हृदय मधुर है, चाल मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम्। चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

उनके वचन मधुर हैं, चरित्र मधुर है, वस्त्र मधुर हैं, अंगभंगिमा मधुर है; उनका चलना मधुर है, घूमना मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ। नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

उनकी बाँसुरी मधुर है, चरण-रज मधुर है, हाथ मधुर हैं, दोनों चरण मधुर हैं; उनका नृत्य मधुर है, मित्रता मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम्। रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

उनका गान मधुर है, पीना मधुर है, भोजन मधुर है, शयन मधुर है; रूप मधुर है, तिलक मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरम्। वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

उनकी क्रिया मधुर है, तैरना मधुर है, हरण (चुराना) मधुर है, रमण मधुर है; उनका त्यागना भी मधुर है, शांत करना मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा। सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

गुंजा (की माला) मधुर है, माला मधुर है, यमुना मधुर है, उसकी लहरें मधुर हैं; जल मधुर है, कमल मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम्। दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

गोपियाँ मधुर हैं, लीला मधुर है, संयोग मधुर है, वियोग (मुक्त होना) भी मधुर है; उनकी दृष्टि मधुर है, शिष्टाचार मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा। दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

ग्वाले मधुर हैं, गायें मधुर हैं, (कृष्ण की) लाठी मधुर है, सृष्टि मधुर है; उनका दलन मधुर है, फल देना मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. उन (कृष्ण) के अधर मधुर हैं, मुख मधुर है, नेत्र मधुर हैं, हँसी मधुर है; हृदय मधुर है, चाल मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।
  2. उनके वचन मधुर हैं, चरित्र मधुर है, वस्त्र मधुर हैं, अंगभंगिमा मधुर है; उनका चलना मधुर है, घूमना मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।
  3. उनकी बाँसुरी मधुर है, चरण-रज मधुर है, हाथ मधुर हैं, दोनों चरण मधुर हैं; उनका नृत्य मधुर है, मित्रता मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।
  4. उनका गान मधुर है, पीना मधुर है, भोजन मधुर है, शयन मधुर है; रूप मधुर है, तिलक मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।
  5. उनकी क्रिया मधुर है, तैरना मधुर है, हरण (चुराना) मधुर है, रमण मधुर है; उनका त्यागना भी मधुर है, शांत करना मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।
  6. गुंजा (की माला) मधुर है, माला मधुर है, यमुना मधुर है, उसकी लहरें मधुर हैं; जल मधुर है, कमल मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।
  7. गोपियाँ मधुर हैं, लीला मधुर है, संयोग मधुर है, वियोग (मुक्त होना) भी मधुर है; उनकी दृष्टि मधुर है, शिष्टाचार मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।
  8. ग्वाले मधुर हैं, गायें मधुर हैं, (कृष्ण की) लाठी मधुर है, सृष्टि मधुर है; उनका दलन मधुर है, फल देना मधुर है — मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।

लाभ

  • मन में प्रेम, भक्ति और आनंद का संचार होता है।
  • चित्त शांत व प्रसन्न होता है।
  • सरल व लयबद्ध होने से सभी आयु वर्ग के लिए उपयुक्त।

कब करें पाठ

प्रातः व संध्या पूजा मेंजन्माष्टमी परबुधवार को

पाठ विधि

श्री कृष्ण के समक्ष तुलसीदल अर्पित कर प्रेमभाव से आठों श्लोकों का मधुर लय में पाठ करें। प्रत्येक श्लोक के अंत में "मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्" का भाव अनुभव करें।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण (8/8 श्लोक)
स्रोत परंपरावल्लभाचार्य कृत मधुराष्टकम्
रचयितावल्लभाचार्य
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
श्री कृष्ण के पाठ
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मधुराष्टकम् — सामान्य प्रश्न

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