महालक्ष्मी अष्टकम्

mahālakṣmī aṣṭakam

Mahalakshmi Ashtakam

समय
4–5 मिनट
श्लोक
9
कठिनाई
मध्यम (Intermediate)
शुभ दिन
शुक्रवार; दीपावली
उद्देश्य:धन (Wealth)समृद्धि (Prosperity)पाप नाश (Purification)
✓ संपूर्ण (8/8 श्लोक)

श्री महालक्ष्म्यष्टकम् माँ महालक्ष्मी की आठ श्लोकों की संस्कृत स्तुति है, जो देवराज इंद्र की कही मानी जाती है और "नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते" से शुरू होती है। हर श्लोक "महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते" पर रुकता है। अंत की फलश्रुति कहती है कि भक्ति से इसका पाठ करने वाला सब सिद्धियाँ पाता है।

परिचय

माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।

स्रोत: पद्म पुराण — इंद्र कृत स्तुति; संपूर्ण आठ श्लोक व फलश्रुति सहित

एक नज़र में

मंत्र / पाठमहालक्ष्मी अष्टकम्
IASTmahālakṣmī aṣṭakam
देवतामाँ लक्ष्मी
मूल स्रोतपद्म पुराण — इंद्र कृत स्तुति; संपूर्ण आठ श्लोक व फलश्रुति सहित
शुभ दिनशुक्रवार; दीपावली
पाठ समय4–5 मिनट
कठिनाईमध्यम (Intermediate)

उद्भव / पृष्ठभूमि

महालक्ष्मी अष्टकम् पद्म पुराण से लिया गया एक प्रसिद्ध स्तोत्र है, जिसकी स्तुति देवराज इंद्र द्वारा की गई मानी जाती है। आठ श्लोकों के इस स्तोत्र में माँ महालक्ष्मी के विविध रूपों व गुणों की वंदना है; प्रत्येक श्लोक "महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते" पर समाप्त होता है।

संपूर्ण अष्टकम्

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नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

हे महामाया, श्री-पीठ पर विराजमान, देवों द्वारा पूजित, शंख-चक्र-गदा धारण करने वाली माँ महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि। सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

हे गरुड़ पर आरूढ़, कोलासुर के लिए भयंकर, समस्त पापों को हरने वाली देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि। सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

हे सर्वज्ञ, सब वर देने वाली, समस्त दुष्टों के लिए भयंकर तथा सब दुःखों को हरने वाली देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि। मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

हे सिद्धि व बुद्धि देने वाली, भोग व मोक्ष प्रदान करने वाली, मंत्र-स्वरूपा देवी महालक्ष्मी, आपको सदा नमस्कार है।

आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि। योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

हे आदि-अंत रहित, आदिशक्ति महेश्वरी, योग से उत्पन्न व योगस्वरूपा देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे। महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

हे स्थूल, सूक्ष्म व महारौद्र रूपा, महाशक्ति व महोदर वाली, महान पापों को हरने वाली देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि। परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

हे कमल के आसन पर विराजमान, परब्रह्म स्वरूपिणी, परमेश्वरी जगत की माता देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते। जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥

हे श्वेत वस्त्र धारण करने वाली, अनेक अलंकारों से भूषित, जगत में स्थित जगत की माता देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।

॥ फलश्रुति ॥ महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः। सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा॥

जो भक्तिमान मनुष्य इस महालक्ष्मी अष्टक स्तोत्र का पाठ करता है, वह समस्त सिद्धियाँ प्राप्त करता है और सदा ऐश्वर्य (राज्य) को प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे महामाया, श्री-पीठ पर विराजमान, देवों द्वारा पूजित, शंख-चक्र-गदा धारण करने वाली माँ महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।
  2. हे गरुड़ पर आरूढ़, कोलासुर के लिए भयंकर, समस्त पापों को हरने वाली देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।
  3. हे सर्वज्ञ, सब वर देने वाली, समस्त दुष्टों के लिए भयंकर तथा सब दुःखों को हरने वाली देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।
  4. हे सिद्धि व बुद्धि देने वाली, भोग व मोक्ष प्रदान करने वाली, मंत्र-स्वरूपा देवी महालक्ष्मी, आपको सदा नमस्कार है।
  5. हे आदि-अंत रहित, आदिशक्ति महेश्वरी, योग से उत्पन्न व योगस्वरूपा देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।
  6. हे स्थूल, सूक्ष्म व महारौद्र रूपा, महाशक्ति व महोदर वाली, महान पापों को हरने वाली देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।
  7. हे कमल के आसन पर विराजमान, परब्रह्म स्वरूपिणी, परमेश्वरी जगत की माता देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।
  8. हे श्वेत वस्त्र धारण करने वाली, अनेक अलंकारों से भूषित, जगत में स्थित जगत की माता देवी महालक्ष्मी, आपको नमस्कार है।
  9. जो भक्तिमान मनुष्य इस महालक्ष्मी अष्टक स्तोत्र का पाठ करता है, वह समस्त सिद्धियाँ प्राप्त करता है और सदा ऐश्वर्य (राज्य) को प्राप्त करता है।

लाभ

  • धन, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
  • पापों व दुःखों का नाश होता है।
  • घर में सुख-शांति का वास होता है।

कब करें पाठ

शुक्रवार कोदीपावली परप्रातः व संध्या पूजा में

पाठ विधि

माँ लक्ष्मी के समक्ष कमल पुष्प व मिठाई अर्पित कर आठों श्लोकों का शुद्ध पाठ करें। प्रत्येक श्लोक के अंत में "महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते" पर नमन का भाव रखें।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण (8/8 श्लोक)
स्रोत परंपरापद्म पुराण — महालक्ष्म्यष्टकम् (इंद्र कृत, परंपरागत मान्यता) · bhaktibharat.com — श्री महालक्ष्मी अष्टक · hindudevotionalblog.com — महालक्ष्मि अष्टकं नमस्तेऽस्तु महामाये
रचयितादेवराज इंद्र
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

देव परिचय

माँ लक्ष्मी

Goddess Lakshmi

माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।

देवता वर्गधन · समृद्धि · ऐश्वर्य · सौभाग्य
वाहनउल्लू
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मुख्य मंत्रॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
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