FAQ
श्री खाटू श्याम — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खाटू श्याम महाभारत के वीर बर्बरीक हैं — शीश दान देने वाले, जिन्हें श्रीकृष्ण ने अपना "श्याम" नाम दिया; कलियुग में "हारे का सहारा" कहे जाते हैं। खाटू श्याम जी वस्तुतः महाभारत के वीर बर्बरीक हैं — घटोत्कच तथा कामकटंकटा (मोर्वी) के पुत्र और भीम के पौत्र। उन्होंने महीसागर संगम के गुप्त क्षेत्र में नवदुर्गा की तपस्या कर दिव्य बल तथा तीन अमोघ बाण प्राप्त किए, इसीलिए वे "तीन बाण धारी" कहलाते हैं।
परंपरा के अनुसार श्री खाटू श्याम का वाहन नीला घोड़ा है। उनकी शक्ति/संगिनी — मानी जाती हैं।
श्री खाटू श्याम को श्याम बाबा, बर्बरीक, हारे का सहारा, तीन बाण धारी आदि नामों से भी जाना जाता है। हर नाम उनके किसी एक स्वरूप या गुण की ओर संकेत करता है।
शीश-रूप विग्रह; केसरिया बागा, रत्नजड़ित सिंहासन, सिर पर मुकुट व चँवर, गले में पुष्प-माला, हाथ में धनुष व तीन बाण तथा मोरछड़ी; वाहन नीला घोड़ा। परंपरा में उन्हें शरणागत रक्षा, त्याग व बलिदान, मनोकामना पूर्ति, हारे का सहारा का अधिष्ठाता माना जाता है।
इस पृष्ठ पर श्री खाटू श्याम से जुड़े 5 भक्ति पाठ उपलब्ध हैं — आरती, चालीसा, मंत्र व स्तोत्र सहित। हर पाठ हिन्दी, IAST और रोमन तीनों लिपियों में पढ़ा जा सकता है।
