श्री सत्यनारायण आरती
śrī satyanārāyaṇa āratī
Satyanarayan Aarti (Jai Lakshmi Ramana)
परिचय
भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।
स्रोत: पारंपरिक सत्यनारायण आरती
उद्भव / पृष्ठभूमि
भगवान सत्यनारायण श्रीविष्णु का सत्य-स्वरूप हैं। यह आरती सत्यनारायण व्रत-कथा व पूजा के समापन में, विशेषकर पूर्णिमा को, गाई जाती है, जिससे घर में सुख, समृद्धि व मनोकामना-पूर्ति होती है।
आरती (लिरिक्स)
जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन-पातक हरना॥
हे लक्ष्मीपति, आपकी जय हो! हे सत्यनारायण स्वामी, आप भक्तों के पापों का हरण करने वाले हैं।
रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे। नारद करत निराजन, घण्टा ध्वनि बाजे॥
रत्नजड़ित सिंहासन पर आपकी अद्भुत छवि सुशोभित है; नारद जी आरती उतारते हैं और घण्टे की ध्वनि गूँजती है।
प्रगट भये कलि कारण, द्विज को दरस दियो। बूढ़ो ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो॥
कलियुग के उद्धार हेतु आप प्रकट हुए और ब्राह्मण को दर्शन दिया; वृद्ध ब्राह्मण रूप धारण कर आपने (निर्धन का) घर स्वर्ण-महल बना दिया।
भाव-भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धरयो। श्रद्धा-धारण कीन्ही, तिनको काज सरयो॥
भाव व भक्ति के कारण आपने क्षण-क्षण में अनेक रूप धारण किए; जिन्होंने श्रद्धा धारण की, उनके सब कार्य सिद्ध हो गए।
सत्यनारायण की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
जो भक्त श्रद्धा से सत्यनारायण की यह आरती गाता है, वह मनोवांछित फल पाता है — ऐसा शिवानन्द स्वामी कहते हैं।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे लक्ष्मीपति, आपकी जय हो! हे सत्यनारायण स्वामी, आप भक्तों के पापों का हरण करने वाले हैं।
- रत्नजड़ित सिंहासन पर आपकी अद्भुत छवि सुशोभित है; नारद जी आरती उतारते हैं और घण्टे की ध्वनि गूँजती है।
- कलियुग के उद्धार हेतु आप प्रकट हुए और ब्राह्मण को दर्शन दिया; वृद्ध ब्राह्मण रूप धारण कर आपने (निर्धन का) घर स्वर्ण-महल बना दिया।
- भाव व भक्ति के कारण आपने क्षण-क्षण में अनेक रूप धारण किए; जिन्होंने श्रद्धा धारण की, उनके सब कार्य सिद्ध हो गए।
- जो भक्त श्रद्धा से सत्यनारायण की यह आरती गाता है, वह मनोवांछित फल पाता है — ऐसा शिवानन्द स्वामी कहते हैं।
लाभ
- घर में सुख, समृद्धि व शांति की प्राप्ति होती है।
- व्रत-कथा के पुण्य से मनोकामना पूर्ण होती है।
- पापों का नाश होकर भक्ति व सकारात्मकता बढ़ती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
सत्यनारायण व्रत-कथा के पश्चात भगवान सत्यनारायण के समक्ष पंचामृत व पंजीरी (चूरमा) का भोग अर्पित करें, दीप जलाकर आरती गाएँ और तत्पश्चात प्रसाद वितरण करें।
प्रामाणिकता व स्रोत
देव परिचय
श्री विष्णु
Lord Vishnu
भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।
