श्री सत्यनारायण आरती

śrī satyanārāyaṇa āratī

Satyanarayan Aarti (Jai Lakshmi Ramana)

समय
4 मिनट
श्लोक/चौपाई
9
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
पूर्णिमा; सत्यनारायण व्रत-कथा के बाद; शुभ अवसर
उद्देश्य:मनोकामना (Wish fulfilment)समृद्धि (Prosperity)शुभ आरम्भ (Auspicious beginnings)
✓ संपूर्ण

"जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा" सत्यनारायण व्रत-कथा के अंत में गाई जाने वाली आरती है। इसके नौ पद पूरी व्रत-कथा को संक्षेप में दोहराते हैं — बूढ़े ब्राह्मण के वेश में दर्शन, लकड़हारे और राजा पर कृपा, श्रद्धा छोड़ने वाले वैश्य का फल, और अंत में प्रसाद: "चढ़त प्रसाद सवायो, कदली फल, मेवा"।

परिचय

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

स्रोत: "जय लक्ष्मी रमणा" — सत्यनारायण व्रत-कथा के समापन की परंपरागत आरती

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री सत्यनारायण आरती
IASTśrī satyanārāyaṇa āratī
देवताश्री विष्णु
मूल स्रोत"जय लक्ष्मी रमणा" — सत्यनारायण व्रत-कथा के समापन की परंपरागत आरती
शुभ दिनपूर्णिमा; सत्यनारायण व्रत-कथा के बाद; शुभ अवसर
पाठ समय4 मिनट
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह आरती अपने आप में सत्यनारायण कथा का सार है — कथा सुनने के बाद भक्त आरती में वही प्रसंग फिर से गा लेता है।

स्वरूप (पद 1–2). सत्यनारायण "लक्ष्मी-रमण" हैं — लक्ष्मी के पति, यानी विष्णु — और "जन पातक हरणा", लोगों के पाप हरने वाले। रत्नजड़ित सिंहासन पर उनकी छवि है और नारद उनकी आरती करते हैं।

कथा के प्रसंग (पद 3–6). "प्रकट भये कलि कारण, द्विज को दर्श दियो; बूढ़ा ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो" — कलियुग के लिए प्रभु ने एक ब्राह्मण को बूढ़े ब्राह्मण के वेश में दर्शन दिए और उसे समृद्ध किया। फिर दुर्बल लकड़हारे ("भील कठारो") और राजा चन्द्रचूड़ पर कृपा। पद 5 कथा का सबसे बड़ा सबक है — "वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्ही; सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर-स्तुति कीन्हीं": मनोरथ पूरा होने पर श्रद्धा छोड़ देने वाले वैश्य ने उसका फल भोगा और फिर स्तुति की।

भाव ही मुख्य (पद 6–7). "भाव भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धरयो" — प्रभु भक्ति के भाव से क्षण-क्षण में रूप धरते हैं; और ग्वाल-बालों के साथ वन में भक्ति करने वाले राजा को मनचाहा फल मिला।

प्रसाद (पद 8). केले, मेवा और सवाया प्रसाद, धूप-दीप और तुलसी — "राजी सत्यदेवा": सत्यदेव इतने से प्रसन्न हो जाते हैं।

आरती (लिरिक्स)

PDF डाउनलोड

जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥

हे लक्ष्मी-रमण (लक्ष्मी के पति), हे स्वामी, आपकी जय हो! हे सत्यनारायण स्वामी, आप लोगों के पाप हरने वाले हैं।

रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजै। नारद करत निराजन, घण्टा ध्वनि बाजै॥

रत्नों से जड़े सिंहासन पर आपकी अद्भुत छवि विराजती है; नारद जी आपकी आरती (नीराजन) करते हैं और घंटे की ध्वनि बजती है।

प्रकट भये कलि कारण, द्विज को दर्श दियो। बूढ़ा ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो॥

कलियुग (के जीवों) के कारण आप प्रकट हुए और एक ब्राह्मण को दर्शन दिए; बूढ़े ब्राह्मण का वेश धरकर (उसके घर को) सोने का महल बना दिया।

दुर्बल भील कठारो, जिन पर कृपा करी। चन्द्रचूड़ एक राजा, तिनकी विपत्ति हरी॥

दुर्बल भील (लकड़हारे) पर आपने कृपा की; और चन्द्रचूड़ नाम के एक राजा की विपत्ति हर ली।

वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्ही। सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर-स्तुति कीन्हीं॥

एक वैश्य ने मनोरथ पाया, पर (फिर) श्रद्धा छोड़ दी; हे प्रभु, उसने उसका फल भोगा और फिर आपकी स्तुति की।

भाव भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धरयो। श्रद्धा धारण कीन्हीं, तिनको काज सरयो॥

भाव और भक्ति के कारण आपने क्षण-क्षण में रूप धारण किए; जिन्होंने श्रद्धा धारण की, उनके काम सिद्ध हुए।

ग्वाल-बाल संग राजा, वन में भक्ति करी। मनवांछित फल दीन्हों, दीनदयाल हरी॥

एक राजा ने ग्वाल-बालों के संग वन में भक्ति की; दीनों पर दया करने वाले हरि ने उसे मनचाहा फल दिया।

चढ़त प्रसाद सवायो, कदली फल, मेवा। धूप दीप तुलसी से, राजी सत्यदेवा॥

सवाया प्रसाद, केले और मेवा चढ़ते हैं; धूप, दीप और तुलसी से ही सत्यदेव प्रसन्न हो जाते हैं।

श्री सत्यनारायण जी की आरती, जो कोई नर गावै। ऋद्धि-सिद्ध सुख-संपत्ति, सहज रूप पावे॥

(फलश्रुति) जो कोई मनुष्य श्री सत्यनारायण जी की यह आरती गाता है, वह ऋद्धि-सिद्धि और सुख-संपत्ति सहज ही पा लेता है।

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे लक्ष्मी-रमण (लक्ष्मी के पति), हे स्वामी, आपकी जय हो! हे सत्यनारायण स्वामी, आप लोगों के पाप हरने वाले हैं।
  2. रत्नों से जड़े सिंहासन पर आपकी अद्भुत छवि विराजती है; नारद जी आपकी आरती (नीराजन) करते हैं और घंटे की ध्वनि बजती है।
  3. कलियुग (के जीवों) के कारण आप प्रकट हुए और एक ब्राह्मण को दर्शन दिए; बूढ़े ब्राह्मण का वेश धरकर (उसके घर को) सोने का महल बना दिया।
  4. दुर्बल भील (लकड़हारे) पर आपने कृपा की; और चन्द्रचूड़ नाम के एक राजा की विपत्ति हर ली।
  5. एक वैश्य ने मनोरथ पाया, पर (फिर) श्रद्धा छोड़ दी; हे प्रभु, उसने उसका फल भोगा और फिर आपकी स्तुति की।
  6. भाव और भक्ति के कारण आपने क्षण-क्षण में रूप धारण किए; जिन्होंने श्रद्धा धारण की, उनके काम सिद्ध हुए।
  7. एक राजा ने ग्वाल-बालों के संग वन में भक्ति की; दीनों पर दया करने वाले हरि ने उसे मनचाहा फल दिया।
  8. सवाया प्रसाद, केले और मेवा चढ़ते हैं; धूप, दीप और तुलसी से ही सत्यदेव प्रसन्न हो जाते हैं।
  9. (फलश्रुति) जो कोई मनुष्य श्री सत्यनारायण जी की यह आरती गाता है, वह ऋद्धि-सिद्धि और सुख-संपत्ति सहज ही पा लेता है।

लाभ

  • सत्यनारायण व्रत-कथा का समापन — आरती कथा के प्रसंग ही दोहराती है।
  • फलश्रुति: आरती गाने वाला ऋद्धि-सिद्धि और सुख-संपत्ति सहज ही पाता है।
  • श्रद्धा बनाए रखने का सबक — पद 5 का वैश्य, जिसने मनोरथ पाकर श्रद्धा छोड़ी और फल भोगा।
  • सरल पूजा का भाव — "धूप दीप तुलसी से, राजी सत्यदेवा"।

कब करें पाठ

पूर्णिमा कोसत्यनारायण व्रत-कथा के समापन परगृह-प्रवेश, विवाह आदि शुभ अवसरों पर

पाठ विधि

सत्यनारायण कथा पूरी होने के बाद भगवान के समक्ष घी का दीप या कपूर जलाएँ, और केले, मेवा व पंजीरी का प्रसाद तथा तुलसीदल रखें — आठवाँ पद यही गिनाता है। टेक "जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा" हर पद के बाद दोहराएँ। आरती के बाद प्रसाद सबमें बाँटें।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराbhaktibharat.com — श्री सत्यनारायण जी आरती (आधार-पाठ) · hindunidhi.com — श्री सत्यनारायण आरती · hindi.webdunia.com — श्री सत्यनारायणजी की आरती · drikpanchang.com — श्री सत्यनारायण आरती · bhaktvatsal.com — श्री सत्यनारायण जी की आरती
रचयिताअज्ञात (दो प्रतियाँ फलश्रुति में "शिवानन्द स्वामी" की छाप देती हैं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

श्री विष्णु

Lord Vishnu

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

देवता वर्गपालन · रक्षा · धर्म-संस्थापना
वाहनगरुड़
संबंधित वारगुरुवार
मुख्य मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवाय
श्री विष्णु के पाठ
सभी पाठ देखें

श्री सत्यनारायण आरती — सामान्य प्रश्न

श्री विष्णु भक्ति संग्रह

आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ