समय
2–3 मिनट
श्लोक/चौपाई
4
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
नृसिंह जयंती (वैशाख शुक्ल चतुर्दशी); संकट के समय
उद्देश्य:रक्षा (Protection)भय-निवारण (Freedom from fear)संकट-मोचन (Relief from troubles)
✓ संपूर्ण
"ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे" भगवान नृसिंह की प्रचलित आरती है। इसके चार पद हैं, और पहला ही पद नृसिंह-अवतार का सार है — "स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे": खंभा फाड़कर प्रभु प्रकट हुए और भक्त का कष्ट हर लिया। अंत में ब्रह्मा आरती करते हैं और शिव पुष्प बरसाते हैं।
FAQ
श्री नृसिंह भगवान आरती — सामान्य प्रश्न
चार — "ॐ जय नरसिंह हरे" से "शिवजी जय जय कहकर, पुष्पन बरसावे" तक। तीनों प्रकाशित प्रतियों में ये चारों पद हैं।
नृसिंह-अवतार का प्रसंग — भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान खंभा फाड़कर आधे नर, आधे सिंह के रूप में प्रकट हुए। आरती कहती है — "स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे"।
तीन प्रकाशित प्रतियों से — द्रिक पंचांग (आधार), स्टार्सटेल और जम्भभक्ति। चारों पद तीनों में हैं।
पर्व
