श्री नृसिंह भगवान आरती
śrī nṛsiṃha bhagavāna āratī
Narsimha Bhagwan Aarti
परिचय
भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।
स्रोत: पारंपरिक नृसिंह भगवान आरती
उद्भव / पृष्ठभूमि
भगवान नृसिंह श्रीविष्णु के उग्र रक्षक अवतार हैं, जिन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा हेतु हिरण्यकशिपु का वध किया। यह आरती नृसिंह जयंती (वैशाख शुक्ल चतुर्दशी) तथा रक्षा-हेतु गाई जाती है।
आरती (लिरिक्स)
जय नृसिंह भगवाना, जय जय नृसिंह भगवाना। भक्त प्रह्लाद उबारे, हिरण्यकश्यप हाना॥
हे नृसिंह भगवान, आपकी जय हो! आपने भक्त प्रह्लाद का उद्धार किया और हिरण्यकशिपु का वध किया।
नर-हरि रूप अनूपम, अर्ध सिंह नर देही। खम्भ फाड़ प्रगट भये, रक्षा भक्त की लेही॥
आधे सिंह व आधे मनुष्य का अनुपम नर-हरि रूप धारण कर; खम्भे को फाड़कर प्रकट हुए और भक्त की रक्षा की।
उग्र रूप अति भीषण, दुष्ट-दलन-कारी। भक्तन हेतु दयालु, शरणागत-पाली॥
अति भीषण उग्र रूप वाले, दुष्टों का दमन करने वाले; किन्तु भक्तों के लिए दयालु तथा शरणागत की रक्षा करने वाले।
जो नर तुमको सुमिरे, भय संकट नाशे। रोग-दोष सब मिटते, सुख-सम्पति आशे॥
जो मनुष्य आपका स्मरण करता है, उसके भय व संकट नष्ट हो जाते हैं; रोग-दोष मिट जाते हैं और सुख-सम्पत्ति की प्राप्ति होती है।
नृसिंह जी की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भय संकट सब मिटते, रक्षा वह पावे॥
जो भक्त श्रद्धा से नृसिंह जी की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय व संकट मिट जाते हैं और उसे रक्षा प्राप्त होती है।
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अर्थ (हिन्दी)
- हे नृसिंह भगवान, आपकी जय हो! आपने भक्त प्रह्लाद का उद्धार किया और हिरण्यकशिपु का वध किया।
- आधे सिंह व आधे मनुष्य का अनुपम नर-हरि रूप धारण कर; खम्भे को फाड़कर प्रकट हुए और भक्त की रक्षा की।
- अति भीषण उग्र रूप वाले, दुष्टों का दमन करने वाले; किन्तु भक्तों के लिए दयालु तथा शरणागत की रक्षा करने वाले।
- जो मनुष्य आपका स्मरण करता है, उसके भय व संकट नष्ट हो जाते हैं; रोग-दोष मिट जाते हैं और सुख-सम्पत्ति की प्राप्ति होती है।
- जो भक्त श्रद्धा से नृसिंह जी की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय व संकट मिट जाते हैं और उसे रक्षा प्राप्त होती है।
लाभ
- भय, शत्रु व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
- संकट व विपत्ति का शीघ्र नाश होता है।
- भक्ति, साहस व आत्मबल में वृद्धि होती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
भगवान नृसिंह के समक्ष तुलसी व पुष्प अर्पित करें, दीप जलाकर "ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं..." अथवा नृसिंह मंत्र का स्मरण करते हुए आरती गाएँ। नृसिंह जयंती पर इसका विशेष महत्व है।
प्रामाणिकता व स्रोत
देव परिचय
श्री विष्णु
Lord Vishnu
भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।
