समय
40 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
गुरुवार व एकादशी
उद्देश्य:शांति (Peace)रक्षा (Protection)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण गायत्री मंत्र
विष्णु गायत्री मंत्र — पारंपरिक विष्णु गायत्री (गायत्री छंद)। हम नारायण को जानते हैं और वासुदेव का ध्यान करते हैं; वे विष्णु हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें। परंपरा में इसे मुख्यतः शांति, रक्षा, आध्यात्मिक उन्नति के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।
FAQ
विष्णु गायत्री मंत्र — सामान्य प्रश्न
यह मन को शांति देता है, रक्षा करता है और भक्ति व आध्यात्मिक उन्नति में सहायक है।
प्रातः-संध्या, गुरुवार व एकादशी को इसका जप विशेष लाभकारी माना जाता है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए तुलसी माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः, संध्या व गुरुवार है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है।
मंत्र के पदों का अर्थ इस प्रकार है — नारायणाय — नारायण को; विद्महे — हम जानते हैं; वासुदेवाय — वासुदेव को; धीमहि — हम ध्यान करते हैं; तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् — वे विष्णु हमारी बुद्धि को प्रेरित करें। पूरे मंत्र का भाव यह है: हम नारायण को जानते हैं और वासुदेव का ध्यान करते हैं; वे विष्णु हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।
यह गायत्री मंत्र है, जिसमें स्वर तथा छंद का भी विधान होता है। परंपरा में ऐसे मंत्रों को गुरु के मुख से शुद्ध उच्चारण सहित सीखना श्रेष्ठ कहा जाता है। श्रद्धापूर्वक श्रवण तथा भावपूर्ण पाठ पर रोक नहीं बताई जाती।
"ना-रा-य-णाय", "विद्-म-हे", "वा-सु-देवाय", "धी-म-हि" स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ है; "प्रचोदयात्" का "त्" हल्का हलन्त। परंपरा में मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व कहा जाता है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
पर्व
