viṣṇu gāyatrī mantra
Vishnu Gayatri Mantra
भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।
स्रोत: पारंपरिक विष्णु गायत्री (गायत्री छंद)
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
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oṃ nārāyaṇāya vidmahe vāsudevāya dhīmahi | tanno viṣṇuḥ pracodayāt ||
Om Narayanaya Vidmahe Vasudevaya Dhimahi, Tanno Vishnuh Prachodayat.
उच्चारण मार्गदर्शन: "ना-रा-य-णाय", "विद्-म-हे", "वा-सु-देवाय", "धी-म-हि" स्पष्ट बोलें। "धीमहि" में "धी" दीर्घ है; "प्रचोदयात्" का "त्" हल्का हलन्त।
जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।
माला: तुलसी माला
उत्तम समय: प्रातः, संध्या व गुरुवार
विष्णु जी के समक्ष तुलसी अर्पित कर तुलसी या स्फटिक माला से 108 बार जप करें। गुरुवार व एकादशी को जप विशेष फलदायी होता है।
Lord Vishnu
मंत्र
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चालीसा
एकादशी
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