समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
गुरुवार व एकादशी
उद्देश्य:शांति (Peace)मोक्ष (Liberation)रक्षा (Protection)
✓ संपूर्ण नाम जाप
ॐ नमो नारायणाय भगवान विष्णु का अष्टाक्षर मंत्र है — ॐ सहित इसमें आठ अक्षर हैं, और अर्थ है "भगवान नारायण को नमस्कार"। वैष्णव परंपरा में यह मूल जप-मंत्र है, जिसे शांति और शरणागति के भाव से प्रायः 108 बार जपा जाता है। द्रिक पंचांग की विष्णु मंत्र-सूची में यही रूप है।
FAQ
ॐ नमो नारायणाय — सामान्य प्रश्न
इसमें आठ अक्षर (न-मो-ना-रा-य-णा-य सहित प्रणव) होते हैं, इसलिए इसे अष्टाक्षर मंत्र कहा जाता है।
गुरुवार, एकादशी व नित्य प्रातः-संध्या में इसका जप शांति, रक्षा व मोक्ष हेतु लाभकारी है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए तुलसी माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः, संध्या व गुरुवार है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है।
मंत्र के पदों का अर्थ इस प्रकार है — ॐ — प्रणव — परब्रह्म का प्रतीक; नमो — नमस्कार; नारायणाय — नारायण (विष्णु) को। पूरे मंत्र का भाव यह है: भगवान नारायण (विष्णु) को नमस्कार। यह अष्टाक्षर (आठ अक्षरों वाला) मंत्र वैष्णव परंपरा का परम मंत्र माना जाता है।
परंपरा में नाम-जप के लिए दीक्षा अनिवार्य नहीं मानी जाती — इसे किसी भी आयु व किसी भी वर्ग का व्यक्ति श्रद्धापूर्वक जप सकता है। यही नाम-मार्ग की विशेषता कही जाती है कि इसमें पात्रता की शर्त भाव है, विधि नहीं।
"न-मो", "ना-रा-य-णाय" को स्पष्ट व सम स्वर में बोलें। "णाय" में मूर्धन्य "ण" का उच्चारण रखें। शांत व भक्तिभाव से दोहराएँ। परंपरा में मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व कहा जाता है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
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