समय
40 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
धनतेरस व गुरुवार
उद्देश्य:स्वास्थ्य (Health)आरोग्य (Healing)रक्षा (Protection)
✓ संपूर्ण नाम जाप
ॐ नमो भगवते धन्वन्तरये एक नाम-मंत्र है — पारंपरिक धन्वन्तरि (आरोग्य देव) मंत्र। अमृत-कलश हाथ में धारण करने वाले, समस्त रोगों का नाश करने वाले, तीनों लोकों के नाथ, श्रीमहाविष्णु के अवतार भगवान धन्वन्तरि को नमस्कार। परंपरा में इसे मुख्यतः स्वास्थ्य, आरोग्य, रक्षा के भाव से जपा जाता है, प्रायः 108 बार अर्थात एक माला।
FAQ
ॐ नमो भगवते धन्वन्तरये — सामान्य प्रश्न
यह आरोग्य व रोग-नाश हेतु जपा जाता है तथा रोगी की शीघ्र स्वस्थता व मानसिक बल में सहायक माना जाता है।
धन्वन्तरि भगवान विष्णु के अवतार व आयुर्वेद/आरोग्य के देव हैं, जिनका प्राकट्य समुद्र-मंथन में अमृत-कलश सहित हुआ था।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए तुलसी माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः व गुरुवार है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है।
मंत्र के पदों का अर्थ इस प्रकार है — धन्वन्तरये — भगवान धन्वन्तरि को; अमृतकलशहस्ताय — हाथ में अमृत-कलश धारण करने वाले को; सर्वामयविनाशनाय — समस्त रोगों का नाश करने वाले को; त्रैलोक्यनाथाय — तीनों लोकों के नाथ को; श्रीमहाविष्णवे नमः — श्रीमहाविष्णु को नमस्कार। पूरे मंत्र का भाव यह है: अमृत-कलश हाथ में धारण करने वाले, समस्त रोगों का नाश करने वाले, तीनों लोकों के नाथ, श्रीमहाविष्णु के अवतार भगवान धन्वन्तरि को नमस्कार।
परंपरा में नाम-जप के लिए दीक्षा अनिवार्य नहीं मानी जाती — इसे किसी भी आयु व किसी भी वर्ग का व्यक्ति श्रद्धापूर्वक जप सकता है। यही नाम-मार्ग की विशेषता कही जाती है कि इसमें पात्रता की शर्त भाव है, विधि नहीं।
"धन्-वन्-त-र-ये", "अमृत-कलश-हस्ताय", "सर्व-आमय-विनाशनाय", "त्रैलोक्य-नाथाय", "श्री-महा-विष्णवे नमः" को स्पष्ट रुककर बोलें। परंपरा में मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व कहा जाता है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
पर्व
