जया एकादशी

Jaya Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

जया एकादशी माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। मान्यता है कि यह व्रत प्रेत, पिशाच व भूत-योनि जैसी अधोगतियों से मुक्ति दिलाने वाला है — इसीलिए इसे विशेष फलदायी माना जाता है।

व्रत कथा

माल्यवान व पुष्पवती को श्राप

देवलोक की एक सभा में गंधर्व माल्यवान व अप्सरा पुष्पवती दिव्य संगीत के दौरान अपने प्रेम में मग्न होकर मर्यादा भूल गए। इससे रुष्ट होकर इंद्र ने उन्हें पिशाच-योनि में जाकर कष्ट भोगने का श्राप दे दिया।

पिशाच-रूप में वे हिमालय के वन में अत्यंत पीड़ा भोगने लगे — उन्हें गंध, स्वाद व स्पर्श तक का बोध न रहा।

अनजाने व्रत से मुक्ति

संयोगवश माघ शुक्ल एकादशी के दिन उन्होंने अन्न ग्रहण नहीं किया और दिनभर पीपल-वृक्ष के नीचे दुखी बैठे रहे — इस प्रकार अनजाने में ही जया एकादशी का व्रत हो गया।

अगले प्रातः इस व्रत के प्रभाव से वे पिशाच-योनि से मुक्त होकर पुनः अपने दिव्य रूप में आ गए और देवलोक को प्राप्त हुए।

लाभ

  • प्रेत, पिशाच व भूत-योनि से मुक्ति
  • समस्त तप, यज्ञ व दान तुल्य पुण्य
  • दिव्य गति; अंत में देवलोक

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी)
संबंधित पर्वएकादशी
तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराएकादशी माहात्म्य (कृष्ण-अर्जुन संवाद)
स्रोतजया एकादशी माहात्म्य — गंधर्व माल्यवान व पुष्पवती प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।