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लिपि:
॥ श्री ॥
जया एकादशी
व्रत कथा · श्री विष्णु
पाठ
व्रत कथा
माल्यवान व पुष्पवती को श्राप
देवलोक की एक सभा में गंधर्व माल्यवान व अप्सरा पुष्पवती दिव्य संगीत के दौरान अपने प्रेम में मग्न होकर मर्यादा भूल गए। इससे रुष्ट होकर इंद्र ने उन्हें पिशाच-योनि में जाकर कष्ट भोगने का श्राप दे दिया।
पिशाच-रूप में वे हिमालय के वन में अत्यंत पीड़ा भोगने लगे — उन्हें गंध, स्वाद व स्पर्श तक का बोध न रहा।
अनजाने व्रत से मुक्ति
संयोगवश माघ शुक्ल एकादशी के दिन उन्होंने अन्न ग्रहण नहीं किया और दिनभर पीपल-वृक्ष के नीचे दुखी बैठे रहे — इस प्रकार अनजाने में ही जया एकादशी का व्रत हो गया।
अगले प्रातः इस व्रत के प्रभाव से वे पिशाच-योनि से मुक्त होकर पुनः अपने दिव्य रूप में आ गए और देवलोक को प्राप्त हुए।
लाभ
- प्रेत, पिशाच व भूत-योनि से मुक्ति
- समस्त तप, यज्ञ व दान तुल्य पुण्य
- दिव्य गति; अंत में देवलोक
स्रोत
जया एकादशी माहात्म्य — गंधर्व माल्यवान व पुष्पवती प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा
