योगिनी एकादशी

Yogini Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

योगिनी एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है (अमांत गणना में ज्येष्ठ कृष्ण)। यह देवशयनी एकादशी से ठीक पहले आती है। मान्यता है कि इसका व्रत समस्त पापों का नाश कर इस लोक में भोग व परलोक में मोक्ष देता है।

कथा वीडियो

व्रत कथा

हेममाली को श्राप

अलकापुरी के राजा कुबेर भगवान शिव के परम भक्त थे। हेममाली नामक यक्ष प्रतिदिन मानसरोवर से पुष्प लाकर कुबेर की शिव-पूजा हेतु देता था। एक दिन अपनी पत्नी विशालाक्षी के प्रेम में मग्न होकर हेममाली समय पर पुष्प न पहुँचा सका।

पूजा में विलंब से क्रुद्ध होकर कुबेर ने उसे श्राप दिया कि वह पत्नी-वियोग सहे और मृत्युलोक में कोढ़ी होकर जीवन बिताए। हेममाली कुष्ठ-रोग से पीड़ित होकर धरती पर भटकने लगा।

ऋषि मार्कण्डेय व व्रत से मुक्ति

भटकते हुए हेममाली महर्षि मार्कण्डेय के आश्रम पहुँचा। ऋषि ने उसकी दशा देखकर उसे आषाढ़ कृष्ण की योगिनी एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने की प्रेरणा दी।

हेममाली ने श्रद्धापूर्वक यह व्रत किया, जिसके प्रभाव से वह कुष्ठ-रोग व श्राप से मुक्त होकर पुनः अपने दिव्य यक्ष-रूप में आ गया और अपनी पत्नी से पुनर्मिलन हुआ।

लाभ

  • समस्त पापों का नाश
  • रोग व श्राप से मुक्ति
  • कथा-श्रवण से अठासी हज़ार ब्राह्मण-भोजन तुल्य पुण्य; अंत में मोक्ष

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी)
संबंधित पर्वएकादशी
तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराएकादशी माहात्म्य (कृष्ण-अर्जुन संवाद)
स्रोतयोगिनी एकादशी माहात्म्य — यक्ष हेममाली व ऋषि मार्कण्डेय प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।