अजा एकादशी

Aja Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

अजा एकादशी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसे अन्नदा एकादशी भी कहते हैं। मान्यता है कि यह व्रत समस्त पापों का नाश कर सत्य व श्रद्धा पर अडिग रहने वाले भक्त को दिव्य कृपा प्रदान करता है।

व्रत कथा

राजा हरिश्चंद्र की परीक्षा

अयोध्या के सत्यनिष्ठ राजा हरिश्चंद्र अपने सत्य-व्रत के लिए विख्यात थे। एक प्रण के कारण उन्हें अपना समस्त राज्य दान करना पड़ा; कठिनाई ऐसी बढ़ी कि उन्हें पत्नी व पुत्र को बेचना पड़ा और स्वयं चांडाल के यहाँ सेवक बनना पड़ा। इतनी विपत्ति में भी उन्होंने सत्य का साथ नहीं छोड़ा।

दुख से व्याकुल राजा को महर्षि गौतम मिले। ऋषि ने उन्हें भाद्रपद कृष्ण की अजा एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने तथा रात्रि-जागरण करने की प्रेरणा दी।

व्रत का फल

राजा ने श्रद्धापूर्वक व्रत किया, जिसके प्रभाव से उनके समस्त पाप व दोष नष्ट हो गए। आकाश से पुष्प-वर्षा हुई, देवताओं के दुंदुभि बजे, उनका मृत पुत्र जीवित हो उठा, पत्नी राजसी वेश में लौट आई और राज्य पुनः प्राप्त हुआ।

यह कथा दर्शाती है कि विपत्ति में भी ईश्वर पर पूर्ण श्रद्धा व सत्य पर अडिग रहना अंततः मुक्ति व कृपा दिलाता है।

लाभ

  • समस्त पापों का नाश
  • सत्य-निष्ठा पर दिव्य कृपा
  • कथा-श्रवण से अश्वमेध यज्ञ तुल्य पुण्य; अंत में स्वर्ग

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी)
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आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराएकादशी माहात्म्य (कृष्ण-अर्जुन संवाद)
स्रोतअजा (अन्नदा) एकादशी माहात्म्य — राजा हरिश्चंद्र प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।