मोक्षदा एकादशी

Mokshada Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था, अतः इसे गीता जयंती भी कहते हैं। "मोक्षदा" अर्थात मोक्ष देने वाली — मान्यता है कि यह व्रत पितरों तक को मुक्ति दिलाता है।

व्रत कथा

राजा वैखानस व पितृ-वेदना

राजा वैखानस को स्वप्न में ज्ञात हुआ कि उनके पिता अपने पूर्व-कर्मों के कारण नरक में कष्ट भोग रहे हैं। व्याकुल राजा ने ऋषि पर्वत मुनि से उपाय पूछा।

ऋषि ने राजा को मार्गशीर्ष शुक्ल की मोक्षदा एकादशी का व्रत करने तथा उसका पुण्य पिता को अर्पित करने की प्रेरणा दी।

पिता की मुक्ति

राजा ने विधिपूर्वक भगवान दामोदर (विष्णु) का धूप-दीप व नैवेद्य से पूजन कर व्रत किया और उसका समस्त पुण्य पिता को अर्पित कर दिया।

इस पुण्य के प्रभाव से राजा के पिता नरक से मुक्त होकर स्वर्ग को प्राप्त हुए। यही कारण है कि इसे मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी कहा जाता है।

लाभ

  • नरक में पीड़ित पितरों की मुक्ति
  • समस्त पापों का नाश
  • मोक्ष व स्वर्ग की प्राप्ति

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी)
संबंधित पर्वएकादशी
तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराएकादशी माहात्म्य (कृष्ण-अर्जुन संवाद)
स्रोतमोक्षदा एकादशी माहात्म्य — राजा वैखानस प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा; गीता जयंती
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।