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लिपि:
॥ श्री ॥
मोक्षदा एकादशी
व्रत कथा · श्री विष्णु
पाठ
व्रत कथा
राजा वैखानस व पितृ-वेदना
राजा वैखानस को स्वप्न में ज्ञात हुआ कि उनके पिता अपने पूर्व-कर्मों के कारण नरक में कष्ट भोग रहे हैं। व्याकुल राजा ने ऋषि पर्वत मुनि से उपाय पूछा।
ऋषि ने राजा को मार्गशीर्ष शुक्ल की मोक्षदा एकादशी का व्रत करने तथा उसका पुण्य पिता को अर्पित करने की प्रेरणा दी।
पिता की मुक्ति
राजा ने विधिपूर्वक भगवान दामोदर (विष्णु) का धूप-दीप व नैवेद्य से पूजन कर व्रत किया और उसका समस्त पुण्य पिता को अर्पित कर दिया।
इस पुण्य के प्रभाव से राजा के पिता नरक से मुक्त होकर स्वर्ग को प्राप्त हुए। यही कारण है कि इसे मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी कहा जाता है।
लाभ
- नरक में पीड़ित पितरों की मुक्ति
- समस्त पापों का नाश
- मोक्ष व स्वर्ग की प्राप्ति
स्रोत
मोक्षदा एकादशी माहात्म्य — राजा वैखानस प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा; गीता जयंती
