श्रावण पुत्रदा एकादशी

Shravana Putrada Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

श्रावण पुत्रदा एकादशी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे पवित्रा (पवित्रोपना) एकादशी भी कहते हैं। "पुत्रदा" अर्थात पुत्र/संतान देने वाली — संतान-सुख की कामना से यह व्रत विशेष रूप से किया जाता है।

व्रत कथा

राजा महिजित की व्यथा

माहिष्मती नगरी के प्रतापी व प्रजावत्सल राजा महिजित के पास सब कुछ था, किंतु संतान न होने से वे अत्यंत दुखी रहते थे। अनेक यज्ञ व अनुष्ठान करने पर भी उन्हें उत्तराधिकारी पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई।

राजा की चिंता से व्याकुल प्रजा वन में महर्षि लोमश के पास पहुँची। ऋषि ने अपनी दिव्य दृष्टि से बताया कि राजा पूर्वजन्म में एक व्यापारी था; एक बार प्यास लगने पर उसने तालाब पर पानी पी रही प्यासी गाय व बछड़े को भगाकर स्वयं जल पी लिया था — इसी पाप के कारण इस जन्म में वे संतान से वंचित हैं।

व्रत से पुत्र-प्राप्ति

ऋषि लोमश ने उपाय बताया — "यदि तुम सब श्रावण शुक्ल की पुत्रदा एकादशी का व्रत करके रात्रि-जागरण करो और उसका पुण्य राजा को अर्पित करो, तो राजा को पुत्र-रत्न की प्राप्ति होगी और उनका दुख दूर होगा।"

प्रजा ने श्रद्धापूर्वक यह व्रत किया और उसका समस्त पुण्य राजा महिजित को अर्पित कर दिया। फलस्वरूप रानी ने गर्भ धारण किया और नौ मास पश्चात एक तेजस्वी व गुणवान पुत्र को जन्म दिया।

लाभ

  • संतान-सुख की प्राप्ति
  • पूर्वजन्म के पापों का शमन
  • वंश-वृद्धि व कल्याण; अंत में विष्णुलोक

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी)
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तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराभविष्य पुराण (कृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को वर्णित)
स्रोतभविष्य पुराण — श्रावण पुत्रदा (पवित्रा) एकादशी; राजा महिजित प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।