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FAQ
सत्यनारायण व्रत कथा — सामान्य प्रश्न
यह कथा स्कंद पुराण के रेवा खण्ड से ली गई है, और इसमें कुल पाँच अध्याय हैं। प्रत्येक अध्याय में व्रत की महिमा एक अलग प्रसंग से बताई गई है।
यह व्रत किसी भी शुभ अवसर, मनोकामना-पूर्ति अथवा पूर्णिमा को किया जा सकता है। गृह-प्रवेश, विवाह तथा नए कार्य के आरंभ पर इसका विशेष प्रचलन है।
मूल संदेश है सत्य के प्रति निष्ठा तथा दिए गए वचन का पालन। कथा के प्रत्येक अध्याय में वे पात्र संकट में पड़ते हैं जो व्रत का संकल्प लेकर भूल जाते हैं, और स्मरण आते ही संकट टल जाता है।
यह व्रत पूर्णिमा, एकादशी या किसी भी शुभ अवसर (गृह प्रवेश, विवाह, मनोकामना पूर्ति आदि) पर किया जा सकता है।
कुल पाँच अध्याय हैं, जिन्हें पूजन के पश्चात क्रमशः सपरिवार सुना जाता है।
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