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लिपि:
॥ श्री ॥

सत्यनारायण व्रत कथा

व्रत कथा · श्री विष्णु

पाठ

व्रत नियम

कौन रखे: गृहस्थ स्त्री-पुरुष, परिवार सहित

कब: पूर्णिमा, एकादशी या किसी भी शुभ संकल्प के दिन (प्रायः संध्या को)

आहार नियम: दिनभर फलाहार/सात्विक आहार; कथा-पूजन के बाद प्रसाद (पंजीरी/सिरा) ग्रहण; तामसिक भोजन वर्जित

पूजन सामग्री

सत्यनारायण/विष्णु चित्र · केले के पत्ते व फल · पंचामृत · पंजीरी (आटा-सूजी का प्रसाद) · तुलसीदल · दीप, धूप, कलश

पूजन विधि

  1. स्वच्छ स्थान पर चौकी सजाकर कलश व सत्यनारायण भगवान की स्थापना करें।
  2. गणेश पूजन व नवग्रह स्मरण के पश्चात भगवान का षोडशोपचार पूजन करें।
  3. पाँचों अध्यायों की कथा श्रद्धापूर्वक सपरिवार सुनें।
  4. पंजीरी/सिरा का भोग लगाकर आरती करें।
  5. प्रसाद सभी में वितरित करें और ब्राह्मण/जरूरतमंद को भोजन कराएँ।

व्रत कथा

व्रत का माहात्म्य

एक बार नारद जी ने भगवान विष्णु से पूछा कि मनुष्यों के कष्ट कैसे दूर हों। भगवान ने "सत्यनारायण व्रत" का उपदेश दिया — जो श्रद्धा से इसे करता है, उसके दुख दूर होते हैं और मनोकामना पूर्ण होती है।

कथा में काशी के एक निर्धन ब्राह्मण, लकड़हारे, साधु वणिक (व्यापारी) और राजा की कथाएँ आती हैं — जिन्होंने व्रत कर समृद्धि पाई, परंतु जब किसी ने श्रद्धा या वचन भंग किया तो कष्ट भोगा, और पुनः व्रत कर पुनः सुख पाया।

इन कथाओं का सार यही है कि सत्य व श्रद्धा से किया गया व्रत फलदायी होता है, और प्रसाद की अवहेलना या वचन-भंग कष्टकारी होता है।

लाभ

  • मनोकामना पूर्ति व समृद्धि।
  • पारिवारिक सुख-शांति।
  • सत्य व श्रद्धा के प्रति निष्ठा का विकास।

स्रोत

रचयिता: स्कंद पुराण परंपरा. स्कंद पुराण — रेवा खण्ड

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