इंदिरा एकादशी

Indira Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

इंदिरा एकादशी आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है (अमांत गणना में भाद्रपद कृष्ण)। यह पितृपक्ष में आती है, अतः इसे पितरों के उद्धार हेतु विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

व्रत कथा

राजा इंद्रसेन व पितृ-वेदना

माहिष्मती नगरी के धर्मनिष्ठ राजा इंद्रसेन को देवर्षि नारद ने बताया कि उनके पिता एकादशी-व्रत के भंग होने के कारण यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं। पिता ने अपने उद्धार हेतु राजा से इंदिरा एकादशी का व्रत करने का अनुरोध भिजवाया था।

नारद जी के निर्देशानुसार राजा ने विधिपूर्वक स्नान कर शालिग्राम-पूजन, ब्राह्मण-भोजन तथा रात्रि-जागरण के साथ इंदिरा एकादशी का व्रत किया।

पितरों का उद्धार

राजा ने व्रत का पुण्य अपने पिता को अर्पित किया। इसके प्रभाव से आकाश से पुष्प-वर्षा हुई और राजा के पिता दिव्य विमान पर बैठकर स्वर्ग को प्राप्त हुए।

कथा का संदेश है — "जो भी व्रत या प्रण लिया जाए, उसे तन, मन व आत्मा से पूर्ण करना चाहिए।"

लाभ

  • यमलोक में पीड़ित पितरों का उद्धार
  • समस्त पापों का नाश
  • आध्यात्मिक उन्नति; अंत में स्वर्ग

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी)
संबंधित पर्वएकादशी
तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराएकादशी माहात्म्य (कृष्ण-अर्जुन संवाद)
स्रोतइंदिरा एकादशी माहात्म्य — राजा इंद्रसेन प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।