वापस
लिपि:
॥ श्री ॥
इंदिरा एकादशी
व्रत कथा · श्री विष्णु
पाठ
व्रत कथा
राजा इंद्रसेन व पितृ-वेदना
माहिष्मती नगरी के धर्मनिष्ठ राजा इंद्रसेन को देवर्षि नारद ने बताया कि उनके पिता एकादशी-व्रत के भंग होने के कारण यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं। पिता ने अपने उद्धार हेतु राजा से इंदिरा एकादशी का व्रत करने का अनुरोध भिजवाया था।
नारद जी के निर्देशानुसार राजा ने विधिपूर्वक स्नान कर शालिग्राम-पूजन, ब्राह्मण-भोजन तथा रात्रि-जागरण के साथ इंदिरा एकादशी का व्रत किया।
पितरों का उद्धार
राजा ने व्रत का पुण्य अपने पिता को अर्पित किया। इसके प्रभाव से आकाश से पुष्प-वर्षा हुई और राजा के पिता दिव्य विमान पर बैठकर स्वर्ग को प्राप्त हुए।
कथा का संदेश है — "जो भी व्रत या प्रण लिया जाए, उसे तन, मन व आत्मा से पूर्ण करना चाहिए।"
लाभ
- यमलोक में पीड़ित पितरों का उद्धार
- समस्त पापों का नाश
- आध्यात्मिक उन्नति; अंत में स्वर्ग
स्रोत
इंदिरा एकादशी माहात्म्य — राजा इंद्रसेन प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा
