षटतिला एकादशी

Shattila Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

षटतिला एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। "षट्-तिला" अर्थात तिल का छह प्रकार से उपयोग — इस दिन तिल का स्नान, उबटन, तर्पण, हवन, भोजन व दान विशेष पुण्यदायी माना जाता है। कहा गया है कि दान किए प्रत्येक तिल के बराबर मनुष्य सहस्र वर्ष स्वर्ग में निवास करता है।

व्रत कथा

कंजूस ब्राह्मणी की कथा

एक ब्राह्मणी कठोर व्रत-उपवास तो करती थी, किंतु किसी को कभी कुछ दान नहीं देती थी। मृत्यु के पश्चात उसे स्वर्ग में स्थान तो मिला, पर उसका दिव्य निवास लगभग रिक्त व दरिद्र था — क्योंकि उसने जीवन भर दान नहीं किया था।

जब उसने इसका कारण पूछा, तो उसे षटतिला एकादशी के व्रत व तिल-दान का महत्व बताया गया।

तिल-दान का माहात्म्य

ब्राह्मणी ने विधिपूर्वक षटतिला एकादशी का व्रत किया और तिल का दान किया। इसके प्रभाव से उसका दिव्य निवास धन-धान्य व वैभव से भर गया।

ऋषि पुलस्त्य ने दाल्भ्य मुनि को यह कथा सुनाते हुए कहा — "बिना दान के कोई धर्म-कार्य पूर्ण नहीं होता।" यह व्रत ब्रह्महत्या, चोरी व ईर्ष्या जैसे पापों तक का नाश करता है।

लाभ

  • गंभीर पापों (ब्रह्महत्या, चोरी, ईर्ष्या) का नाश
  • तिल-दान से धन-धान्य व वैभव
  • अनेक जन्मों के रोगों से मुक्ति; स्वर्ग-निवास

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी)
संबंधित पर्वएकादशी
तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराएकादशी माहात्म्य (पुलस्त्य-दाल्भ्य संवाद)
स्रोतषटतिला एकादशी माहात्म्य — कंजूस ब्राह्मणी प्रसंग; ऋषि पुलस्त्य द्वारा दाल्भ्य को वर्णित · एकादशी माहात्म्य परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।