अपरा एकादशी

Apara Ekadashi

तिथि व्रत (एकादशी)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

अपरा एकादशी ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है (अमांत गणना में वैशाख कृष्ण)। इसे अचला एकादशी भी कहते हैं। "अपरा" अर्थात असीम/अपार — यह व्रत अपार पुण्य प्रदान करने वाला माना जाता है।

व्रत कथा

व्रत का माहात्म्य

शास्त्रों के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत अत्यंत गंभीर पापों — जैसे हत्या, मिथ्या साक्षी, दूसरों को भ्रमित करना व छल — तक का नाश करता है। रणभूमि से भागने वाले योद्धा अथवा गुरु का अपमान करने वाले शिष्य के दोष का भी शमन इस व्रत से बताया गया है।

इसका पुण्य यज्ञ-अवसरों पर गज, अश्व, स्वर्ण, गौ व भूमि दान के तुल्य कहा गया है। इसे "पाप-रूपी वृक्षों को काटने वाली कुल्हाड़ी" तथा "अंधकार को दूर करने वाले सूर्य" के समान बताया गया है।

फल

इस व्रत के पालन से भक्त के हृदय में भगवान विष्णु के प्रति भक्ति उत्तरोत्तर बढ़ती है और अंत में उसे विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।

कथा का श्रवण अथवा पाठ मात्र भी समस्त पापों का नाश करने वाला माना गया है।

लाभ

  • गंभीर पापों व दोषों का नाश
  • गज-अश्व-स्वर्ण-गौ-भूमि दान तुल्य पुण्य
  • विष्णु-भक्ति में वृद्धि; अंत में विष्णुलोक

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारतिथि व्रत (एकादशी)
संबंधित पर्वएकादशी
तिथिएकादशी
आराध्यश्री विष्णु
आज का पंचांग एकादशी विवरण

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपराएकादशी माहात्म्य (कृष्ण-अर्जुन संवाद)
स्रोतअपरा (अचला) एकादशी माहात्म्य (एकादशी माहात्म्य परंपरा)
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है, प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित। विस्तृत विधि व तिथि हेतु पंचांग तथा किसी विद्वान/पुरोहित से परामर्श लें।