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लिपि:
॥ श्री ॥
पाशांकुशा एकादशी
व्रत कथा · श्री विष्णु
पाठ
व्रत कथा
व्रत का माहात्म्य
शास्त्रों के अनुसार पाशांकुशा एकादशी का व्रत समस्त पापों का नाश करता है और भक्त को आरोग्य, समृद्धि व सुख प्रदान करता है। इस दिन भगवान विष्णु का पूजन, रात्रि-जागरण तथा भूमि, गौ, अन्न, जल व वस्त्र का दान विशेष फलदायी बताया गया है।
कहा गया है कि इस व्रत का पुण्य सहस्र अश्वमेध व सैकड़ों राजसूय यज्ञों से भी अधिक है, और यह माता, पिता व पत्नी — तीनों कुलों की पीढ़ियों को विष्णुलोक की गति प्रदान करता है।
फल
सीमित सामर्थ्य वाले भक्त भी अपनी शक्ति अनुसार दान व पूजन कर इस व्रत का पूर्ण फल पा सकते हैं।
व्रत के प्रभाव से भक्त इस लोक में सुख भोगकर अंत में स्वर्ग व विष्णुलोक को प्राप्त होता है।
लाभ
- समस्त पापों का नाश व यम-यातना से मुक्ति
- आरोग्य, समृद्धि व सुख
- तीनों कुलों की पीढ़ियों का उद्धार; अंत में विष्णुलोक
स्रोत
पाशांकुशा (पापांकुशा) एकादशी माहात्म्य (एकादशी माहात्म्य परंपरा)
