संतोषी माता व्रत कथा

Santoshi Mata Vrat Katha

वार व्रत (शुक्रवार)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

संतोषी माता संतोष व सुख की देवी मानी जाती हैं। उनका व्रत प्रायः लगातार 16 शुक्रवार रखा जाता है और मनोकामना पूर्ण होने पर उद्यापन किया जाता है।

इस व्रत का मूल भाव है — संतोष। माता संतोषी की कृपा से घर में सुख, शांति व मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। व्रत में खट्टी वस्तुओं का विशेष निषेध है।

व्रत नियम (Fasting Guide)

कौन रखेमनोकामना रखने वाले स्त्री-पुरुष
कब रखेंलगातार 16 शुक्रवार; मनोकामना पूर्ति पर उद्यापन
आहार नियम:
  • दिन में एक बार भोजन
  • खट्टी वस्तुएँ (खटाई, नींबू, इमली) पूर्णतः वर्जित
  • व्रती व परिवार दोनों खट्टा न खाएँ
अनुशंसित अभ्यास:
  • गुड़-चने का प्रसाद
  • संतोषी माता कथा श्रवण
  • माता की आरती

पूजन सामग्री

संतोषी माता चित्रगुड़ व भुने चनेकलश व जलदीप व धूपलाल पुष्पकेला/फल

पूजन विधि (चरण-दर-चरण)

  1. शुक्रवार प्रातः स्नान कर स्वच्छ स्थान पर माता का चित्र स्थापित करें।
  2. कलश स्थापित कर दीप-धूप जलाएँ और गुड़-चने का भोग लगाएँ।
  3. संतोषी माता की कथा श्रद्धापूर्वक सुनें/पढ़ें।
  4. माता की आरती करें और दिन में एक बार बिना खट्टे का भोजन लें।
  5. 16 शुक्रवार पूर्ण होने पर विधिपूर्वक उद्यापन करें।

व्रत कथा

छोटी बहू की कथा

एक बुढ़िया के सात बेटे थे — छह कमाते थे और सबसे छोटा कुछ नहीं करता था। वह कमाने परदेश चला गया, और पीछे उसकी पत्नी से घर का सारा काम कराया जाता, पर उसे रूखा-सूखा ही मिलता। एक दिन दुखी बहू ने संतोषी माता का व्रत करने का प्रण लिया — शुक्रवार को गुड़-चने का प्रसाद।

माता की कृपा से पहले शुक्रवार के बाद पति का पत्र आया, फिर उसका भेजा पैसा, और कुछ समय बाद पति स्वयं धन कमाकर लौट आया। दोनों अलग घर में सुख से रहने लगे।

उद्यापन के दिन बहू ने जेठानी के बच्चों को भोजन पर बुलाया। जेठानी ने उन्हें सिखा दिया कि खाने के बाद खटाई माँगना। बहू ने खटाई देने से मना किया, तो बच्चों ने पैसे माँग लिए और उनसे इमली लेकर खा ली — इसी भूल से माता का कोप हुआ और बहू पर फिर संकट आया। उसने फिर से नियम से उद्यापन किया, और माता की कृपा से सब सुख लौट आया। इसीलिए संतोषी माता के व्रत में खटाई वर्जित है।

लाभ

  • मनोकामना पूर्ति व घर में संतोष।
  • सुख-समृद्धि व कलह का नाश।
  • धैर्य व संतोष का भाव।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपरापारंपरिक लोक-परंपरा
स्रोतbhaktibharat.com — शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा · hindipath.com — संतोषी माता की व्रत कथा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है; विस्तृत विधि व उद्यापन हेतु बड़ों/पुरोहित से परामर्श लें।

व्रत जानकारी

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संतोषी माता व्रत कथा — सामान्य प्रश्न

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