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FAQ
संतोषी माता व्रत कथा — सामान्य प्रश्न
परंपरा में यह व्रत प्रायः लगातार सोलह शुक्रवार रखा जाता है, और मनोकामना पूर्ण होने पर विधिपूर्वक उद्यापन किया जाता है।
इस व्रत में खट्टी वस्तुओं का विशेष निषेध है — व्रती स्वयं तो खटाई से बचता ही है, परंपरा में उस दिन घर में भी उसका प्रयोग न करने का नियम बताया जाता है।
व्रत का मूल भाव उसके नाम में ही है — संतोष। मान्यता है कि माता की कृपा से घर में सुख, शांति तथा मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
मान्यता है कि व्रत के दिन व्रती व परिवार द्वारा खट्टी वस्तु ग्रहण करने से माता रुष्ट होती हैं, अतः खटाई का पूर्ण निषेध है।
सामान्यतः लगातार 16 शुक्रवार व्रत रखा जाता है और मनोकामना पूर्ण होने पर उद्यापन किया जाता है।
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