संतोषी माता व्रत कथा
पाठ
व्रत नियम
कौन रखे: मनोकामना रखने वाले स्त्री-पुरुष
कब: लगातार 16 शुक्रवार; मनोकामना पूर्ति पर उद्यापन
आहार नियम: दिन में एक बार भोजन; खट्टी वस्तुएँ (खटाई, नींबू, इमली) पूर्णतः वर्जित; व्रती व परिवार दोनों खट्टा न खाएँ
पूजन सामग्री
संतोषी माता चित्र · गुड़ व भुने चने · कलश व जल · दीप व धूप · लाल पुष्प · केला/फल
पूजन विधि
- शुक्रवार प्रातः स्नान कर स्वच्छ स्थान पर माता का चित्र स्थापित करें।
- कलश स्थापित कर दीप-धूप जलाएँ और गुड़-चने का भोग लगाएँ।
- संतोषी माता की कथा श्रद्धापूर्वक सुनें/पढ़ें।
- माता की आरती करें और दिन में एक बार बिना खट्टे का भोजन लें।
- 16 शुक्रवार पूर्ण होने पर विधिपूर्वक उद्यापन करें।
व्रत कथा
छोटी बहू की कथा
एक बुढ़िया के सात बेटे थे — छह कमाते थे और सबसे छोटा कुछ नहीं करता था। वह कमाने परदेश चला गया, और पीछे उसकी पत्नी से घर का सारा काम कराया जाता, पर उसे रूखा-सूखा ही मिलता। एक दिन दुखी बहू ने संतोषी माता का व्रत करने का प्रण लिया — शुक्रवार को गुड़-चने का प्रसाद।
माता की कृपा से पहले शुक्रवार के बाद पति का पत्र आया, फिर उसका भेजा पैसा, और कुछ समय बाद पति स्वयं धन कमाकर लौट आया। दोनों अलग घर में सुख से रहने लगे।
उद्यापन के दिन बहू ने जेठानी के बच्चों को भोजन पर बुलाया। जेठानी ने उन्हें सिखा दिया कि खाने के बाद खटाई माँगना। बहू ने खटाई देने से मना किया, तो बच्चों ने पैसे माँग लिए और उनसे इमली लेकर खा ली — इसी भूल से माता का कोप हुआ और बहू पर फिर संकट आया। उसने फिर से नियम से उद्यापन किया, और माता की कृपा से सब सुख लौट आया। इसीलिए संतोषी माता के व्रत में खटाई वर्जित है।
लाभ
- मनोकामना पूर्ति व घर में संतोष।
- सुख-समृद्धि व कलह का नाश।
- धैर्य व संतोष का भाव।
स्रोत
रचयिता: पारंपरिक. bhaktibharat.com — शुक्रवार संतोषी माता व्रत कथा · hindipath.com — संतोषी माता की व्रत कथा
