अहोई अष्टमी व्रत कथा

Ahoi Ashtami Vrat Katha

विशेष व्रत (निर्जला)

⚠ अंश

परिचय व महत्व

अहोई अष्टमी व्रत माताएँ अपनी संतान की दीर्घायु, सुख व समृद्धि हेतु रखती हैं। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी (दीपावली से लगभग आठ दिन पूर्व) को रखा जाता है। माताएँ "अहोई माता" (पार्वती/देवी का स्वरूप) का पूजन कर तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।

व्रत नियम (Fasting Guide)

कौन रखेसंतानवती माताएँ
कब रखेंकार्तिक कृष्ण अष्टमी; सूर्योदय से तारों के दर्शन तक निर्जला
आहार नियम:
  • पूरे दिन निर्जला व्रत
  • तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलना
  • व्रत के दिन धरती न खोदना (परंपरा)
अनुशंसित अभ्यास:
  • अहोई माता का चित्र बनाकर पूजन
  • अहोई कथा श्रवण
  • तारों/चंद्र को अर्घ्य व संतान का आशीर्वाद

पूजन सामग्री

अहोई माता का चित्र (दीवार/पट)करवा (जल पात्र)दूध-भातसींक व मोती की मालादीप व रोलीफल व मिठाई

पूजन विधि (चरण-दर-चरण)

  1. प्रातः स्नान कर संतान की दीर्घायु हेतु निर्जला व्रत का संकल्प लें।
  2. दीवार पर अहोई माता व उनके सात पुत्रों का चित्र बनाएँ/स्थापित करें।
  3. संध्या को रोली, अक्षत, दूध-भात व पुष्प से माता का पूजन करें।
  4. अहोई अष्टमी व्रत कथा सुनें/पढ़ें व माता की आरती करें।
  5. रात्रि तारों (या चंद्र) को अर्घ्य देकर संतान का मुख देख व्रत खोलें।

व्रत कथा

साहूकार की पत्नी की कथा

किसी नगर में एक साहूकार रहता था, जिसके सात पुत्र थे। दीपावली से पहले घर लीपने के लिए साहूकार की पत्नी खदान में मिट्टी खोदने गई। वहीं सेह (स्याहू) की माँद थी, और अनजाने में कुदाल लगने से सेह का एक बच्चा मर गया। दुखी होकर, पछताती हुई वह घर लौट आई।

कुछ समय बाद उसका एक पुत्र मर गया, फिर दूसरा, और साल भर में सातों पुत्र चल बसे। उसने रोते हुए पड़ोस की स्त्रियों को अनजाने में हुई उस हत्या की बात बताई। वृद्ध स्त्रियों ने कहा कि सच कहकर पछताने से उसका आधा पाप मिट गया है; अब उसी अष्टमी को सेह और उसके बच्चों का चित्र बनाकर भगवती की आराधना और क्षमा-याचना करे।

साहूकार की पत्नी ने कार्तिक कृष्ण अष्टमी को उपवास और पूजा की, और हर वर्ष नियम से यह व्रत करने लगी। माता की कृपा से उसे फिर सात पुत्र प्राप्त हुए। तभी से अहोई अष्टमी के व्रत की परंपरा चली।

लाभ

  • संतान की दीर्घायु व आरोग्य।
  • संतान-सुख व पारिवारिक मंगल।
  • संकटों से रक्षा।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति⚠ अंश
मूल परंपरापारंपरिक लोक-परंपरा
स्रोतbhaktibharat.com — अहोई अष्टमी व्रत कथा (साहूकार के सात लड़के) · hindipath.com — अहोई अष्टमी व्रत कथा
अंतिम अद्यतनजून 2026

संपादकीय टिप्पणी: यह व्रत कथा का सारगर्भित रूप है; क्षेत्रीय परंपरा अनुसार विधि भिन्न हो सकती है — बड़ों/पुरोहित से परामर्श लें।

व्रत जानकारी

व्रत प्रकारविशेष व्रत (निर्जला)
आराध्यमाँ दुर्गा
आज का पंचांग

अहोई अष्टमी व्रत कथा — सामान्य प्रश्न

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