श्री तिरुपति गोविंदा आरती

śrī tirupati goviṃdā āratī

Tirupati Govinda Aarti (Venkateswara)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

स्रोत: श्री वेंकटेश्वर मंदिर, तिरुमला-तिरुपति (आंध्र प्रदेश)

उद्भव / पृष्ठभूमि

भगवान वेंकटेश्वर (गोविंदा) श्रीविष्णु का कलियुग-स्वरूप हैं, जो तिरुमला (तिरुपति, आंध्र प्रदेश) की सात पहाड़ियों पर विराजमान हैं। "गोविंदा-गोविंदा" का जयघोष यहाँ की पहचान है। यह विश्व के सर्वाधिक भक्त-समागम वाले व समृद्ध तीर्थों में से एक है।

आरती (लिरिक्स)

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गोविंदा हरि गोविंदा, वेंकट-रमणा गोविंदा। सप्तगिरि के स्वामी, श्रीनिवास गोविंदा॥

गोविंदा, हरि गोविंदा, हे वेंकट-रमण गोविंदा! हे सात पहाड़ियों के स्वामी, हे श्रीनिवास गोविंदा (आपकी जय)।

पद्मावती-वल्लभ, भक्तन हितकारी। शंख-चक्र-गदा-पद्म, धारे प्रभु प्यारी॥

हे पद्मावती-वल्लभ, भक्तों का हित करने वाले; शंख, चक्र, गदा व पद्म धारण किए हे प्यारे प्रभु।

सुप्रभातम् गाया जाता, दर्शन सुख देते। ऋण-संकट सब हरते, मनवांछित देते॥

प्रातः सुप्रभातम् गाया जाता है, आप दर्शन का सुख देते हैं; आप ऋण व संकट हर लेते हैं और मनोवांछित फल देते हैं।

कलियुग के तुम देवा, वैकुण्ठ-धाम सोहे। "गोविंदा" जयकारा, त्रिभुवन मन मोहे॥

आप कलियुग के देव हैं, (तिरुमला) वैकुण्ठ-धाम सुशोभित है; "गोविंदा" का जयकारा तीनों लोकों के मन को मोह लेता है।

गोविंदा की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। ऋण-संकट सब मिटते, हरि-कृपा पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से गोविंदा (वेंकटेश्वर) की यह आरती गाता है, उसके ऋण-संकट मिट जाते हैं और वह हरि-कृपा प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. गोविंदा, हरि गोविंदा, हे वेंकट-रमण गोविंदा! हे सात पहाड़ियों के स्वामी, हे श्रीनिवास गोविंदा (आपकी जय)।
  2. हे पद्मावती-वल्लभ, भक्तों का हित करने वाले; शंख, चक्र, गदा व पद्म धारण किए हे प्यारे प्रभु।
  3. प्रातः सुप्रभातम् गाया जाता है, आप दर्शन का सुख देते हैं; आप ऋण व संकट हर लेते हैं और मनोवांछित फल देते हैं।
  4. आप कलियुग के देव हैं, (तिरुमला) वैकुण्ठ-धाम सुशोभित है; "गोविंदा" का जयकारा तीनों लोकों के मन को मोह लेता है।
  5. जो भक्त श्रद्धा से गोविंदा (वेंकटेश्वर) की यह आरती गाता है, उसके ऋण-संकट मिट जाते हैं और वह हरि-कृपा प्राप्त करता है।

लाभ

  • ऋण-मुक्ति व आर्थिक संकट से राहत मिलती है।
  • मनोकामना पूर्ण होकर समृद्धि व सुख-शांति आती है।
  • भक्ति व विष्णु-कृपा में वृद्धि होती है।

कब करें पाठ

शनिवार कोवैकुण्ठ एकादशी व एकादशी कोप्रातः (सुप्रभातम्) व संध्या पूजा में

पाठ विधि

भगवान वेंकटेश्वर के समक्ष तुलसी व पुष्प अर्पित करें, "गोविंदा गोविंदा" के जयघोष के साथ श्रद्धापूर्वक आरती गाएँ। शनिवार व वैकुण्ठ एकादशी पर इसका विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री विष्णु

Lord Vishnu

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

देवता वर्गपालन · रक्षा · धर्म-संस्थापना
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