श्री बद्रीनाथ आरती
śrī badrīnātha āratī
Badrinath Aarti (Badrinath Dham)
परिचय
भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।
स्रोत: श्री बद्रीनाथ धाम, चमोली (उत्तराखंड)
उद्भव / पृष्ठभूमि
भगवान बद्रीनाथ श्रीविष्णु का स्वरूप हैं, जो हिमालय में अलकनंदा नदी के तट पर बद्रीनाथ धाम (चमोली, उत्तराखंड) में विराजमान हैं। यह चार धामों व छोटा चारधाम में प्रमुख तीर्थ है। प्रसिद्ध आरती "पवन मंद सुगंध शीतल" यहाँ नित्य गाई जाती है।
आरती (लिरिक्स)
पवन मंद सुगंध शीतल, हेम मंदिर शोभितम्। निकट गंगा बहत निर्मल, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
मंद, सुगंधित व शीतल पवन बहती है, स्वर्णिम मंदिर सुशोभित है; निकट ही निर्मल गंगा (अलकनंदा) बहती है — ऐसे विश्व का भरण करने वाले श्री बद्रीनाथ की (जय)।
शेष सुमिरन करत निशदिन, धरत ध्यान महेश्वरम्। वेद ब्रह्मा करत स्तुति, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
शेषनाग दिन-रात आपका स्मरण करते हैं, महेश्वर (शिव) आपका ध्यान धरते हैं; वेद व ब्रह्मा आपकी स्तुति करते हैं — हे विश्वम्भर श्री बद्रीनाथ।
नर-नारायण तप करते, अलकनंदा पावनम्। हिमगिरि में धाम सोहे, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
यहाँ नर व नारायण ने तप किया, अलकनंदा अति पावन है; हिमालय में आपका धाम सुशोभित है — हे विश्वम्भर श्री बद्रीनाथ।
भक्तन के दुख हरते, देते मोक्ष-पद सुखकरम्। जो जन तेरे दर आए, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
आप भक्तों के दुःख हरते हैं और सुखद मोक्ष-पद देते हैं; जो भी आपके द्वार आता है (वह तर जाता है) — हे विश्वम्भर श्री बद्रीनाथ।
बद्रीनाथ की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भक्ति-मुक्ति वह पावे, हरि-कृपा पावे॥
जो भक्त श्रद्धा से बद्रीनाथ की यह आरती गाता है, वह भक्ति व मुक्ति तथा हरि (विष्णु) की कृपा प्राप्त करता है।
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अर्थ (हिन्दी)
- मंद, सुगंधित व शीतल पवन बहती है, स्वर्णिम मंदिर सुशोभित है; निकट ही निर्मल गंगा (अलकनंदा) बहती है — ऐसे विश्व का भरण करने वाले श्री बद्रीनाथ की (जय)।
- शेषनाग दिन-रात आपका स्मरण करते हैं, महेश्वर (शिव) आपका ध्यान धरते हैं; वेद व ब्रह्मा आपकी स्तुति करते हैं — हे विश्वम्भर श्री बद्रीनाथ।
- यहाँ नर व नारायण ने तप किया, अलकनंदा अति पावन है; हिमालय में आपका धाम सुशोभित है — हे विश्वम्भर श्री बद्रीनाथ।
- आप भक्तों के दुःख हरते हैं और सुखद मोक्ष-पद देते हैं; जो भी आपके द्वार आता है (वह तर जाता है) — हे विश्वम्भर श्री बद्रीनाथ।
- जो भक्त श्रद्धा से बद्रीनाथ की यह आरती गाता है, वह भक्ति व मुक्ति तथा हरि (विष्णु) की कृपा प्राप्त करता है।
लाभ
- भक्ति, सुख-शांति व आध्यात्मिक उन्नति बढ़ती है।
- पापों का नाश होकर मोक्ष-मार्ग प्रशस्त होता है।
- मन को निर्मलता व विष्णु-कृपा प्राप्त होती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
भगवान बद्रीनाथ के समक्ष तुलसी व पुष्प अर्पित करें, "पवन मंद सुगंध शीतल" आरती श्रद्धापूर्वक गाएँ। बद्रीनाथ धाम के कपाट-दर्शन व चारधाम यात्रा में इसका विशेष महत्व है।
प्रामाणिकता व स्रोत
देव परिचय
श्री विष्णु
Lord Vishnu
भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।
