श्री बद्रीनाथ आरती

śrī badrīnātha āratī

Badrinath Aarti (Badrinath Dham)

समय
3–4 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

स्रोत: श्री बद्रीनाथ धाम, चमोली (उत्तराखंड)

उद्भव / पृष्ठभूमि

भगवान बद्रीनाथ श्रीविष्णु का स्वरूप हैं, जो हिमालय में अलकनंदा नदी के तट पर बद्रीनाथ धाम (चमोली, उत्तराखंड) में विराजमान हैं। यह चार धामों व छोटा चारधाम में प्रमुख तीर्थ है। प्रसिद्ध आरती "पवन मंद सुगंध शीतल" यहाँ नित्य गाई जाती है।

आरती (लिरिक्स)

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पवन मंद सुगंध शीतल, हेम मंदिर शोभितम्। निकट गंगा बहत निर्मल, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥

मंद, सुगंधित व शीतल पवन बहती है, स्वर्णिम मंदिर सुशोभित है; निकट ही निर्मल गंगा (अलकनंदा) बहती है — ऐसे विश्व का भरण करने वाले श्री बद्रीनाथ की (जय)।

शेष सुमिरन करत निशदिन, धरत ध्यान महेश्वरम्। वेद ब्रह्मा करत स्तुति, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥

शेषनाग दिन-रात आपका स्मरण करते हैं, महेश्वर (शिव) आपका ध्यान धरते हैं; वेद व ब्रह्मा आपकी स्तुति करते हैं — हे विश्वम्भर श्री बद्रीनाथ।

नर-नारायण तप करते, अलकनंदा पावनम्। हिमगिरि में धाम सोहे, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥

यहाँ नर व नारायण ने तप किया, अलकनंदा अति पावन है; हिमालय में आपका धाम सुशोभित है — हे विश्वम्भर श्री बद्रीनाथ।

भक्तन के दुख हरते, देते मोक्ष-पद सुखकरम्। जो जन तेरे दर आए, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥

आप भक्तों के दुःख हरते हैं और सुखद मोक्ष-पद देते हैं; जो भी आपके द्वार आता है (वह तर जाता है) — हे विश्वम्भर श्री बद्रीनाथ।

बद्रीनाथ की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भक्ति-मुक्ति वह पावे, हरि-कृपा पावे॥

जो भक्त श्रद्धा से बद्रीनाथ की यह आरती गाता है, वह भक्ति व मुक्ति तथा हरि (विष्णु) की कृपा प्राप्त करता है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. मंद, सुगंधित व शीतल पवन बहती है, स्वर्णिम मंदिर सुशोभित है; निकट ही निर्मल गंगा (अलकनंदा) बहती है — ऐसे विश्व का भरण करने वाले श्री बद्रीनाथ की (जय)।
  2. शेषनाग दिन-रात आपका स्मरण करते हैं, महेश्वर (शिव) आपका ध्यान धरते हैं; वेद व ब्रह्मा आपकी स्तुति करते हैं — हे विश्वम्भर श्री बद्रीनाथ।
  3. यहाँ नर व नारायण ने तप किया, अलकनंदा अति पावन है; हिमालय में आपका धाम सुशोभित है — हे विश्वम्भर श्री बद्रीनाथ।
  4. आप भक्तों के दुःख हरते हैं और सुखद मोक्ष-पद देते हैं; जो भी आपके द्वार आता है (वह तर जाता है) — हे विश्वम्भर श्री बद्रीनाथ।
  5. जो भक्त श्रद्धा से बद्रीनाथ की यह आरती गाता है, वह भक्ति व मुक्ति तथा हरि (विष्णु) की कृपा प्राप्त करता है।

लाभ

  • भक्ति, सुख-शांति व आध्यात्मिक उन्नति बढ़ती है।
  • पापों का नाश होकर मोक्ष-मार्ग प्रशस्त होता है।
  • मन को निर्मलता व विष्णु-कृपा प्राप्त होती है।

कब करें पाठ

एकादशी व नित्य संध्या मेंचारधाम यात्रा/दर्शन के समयगुरुवार को

पाठ विधि

भगवान बद्रीनाथ के समक्ष तुलसी व पुष्प अर्पित करें, "पवन मंद सुगंध शीतल" आरती श्रद्धापूर्वक गाएँ। बद्रीनाथ धाम के कपाट-दर्शन व चारधाम यात्रा में इसका विशेष महत्व है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरापारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह
रचयितापारंपरिक
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री विष्णु

Lord Vishnu

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

देवता वर्गपालन · रक्षा · धर्म-संस्थापना
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मुख्य मंत्रॐ नमो भगवते वासुदेवाय
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