समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
7
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
एकादशी; बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने पर; नित्य संध्या
उद्देश्य:मोक्ष (Liberation)पाप-नाश (Removal of sins)तीर्थ-पुण्य (Merit of pilgrimage)
✓ संपूर्ण
"पवन मंद सुगंध शीतल, हेम मंदिर शोभितम्; निकट गंगा बहत निर्मल, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्" श्री बद्रीनाथ की प्रचलित आरती-स्तुति है। इसके सात छंद हैं, और हर छंद "श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्" पर लौटता है। आरती बद्रीनाथ धाम का दृश्य रचती है — मंद सुगंधित शीतल पवन, सुनहरा मंदिर और पास बहती निर्मल गंगा (अलकनंदा)।
FAQ
श्री बद्रीनाथ आरती — सामान्य प्रश्न
सात — छह स्तुति-छंद और एक फलश्रुति ("श्री बद्रजी के पंच रत्न, पढ़त पाप विनाशनम्")। हर स्तुति-छंद "श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्" पर समाप्त होता है, और पहला छंद टेक की तरह दोहराया जाता है।
विश्वम्भर = विश्व का भरण (पालन-पोषण) करने वाला — भगवान विष्णु का एक नाम। बद्रीनाथ विष्णु के ही रूप हैं, इसलिए हर छंद उन्हें "श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्" कहकर पूरा होता है।
ई-स्तुति जैसी कुछ प्रतियाँ छंद 4 में "इन्द्र चन्द्र कुबेर दिनकर, धूप दीप निवेदितम्", छंद 5 में "श्रीभूमि लक्ष्मी चँवर डोलैं" और फलश्रुति में "श्रीबदरीनाथ की परम स्तुति यह पढ़त पाप विनाशनम्" पढ़ती हैं। भक्तिभारत और धर्मसार का पाठ एक है, और वही यहाँ रखा गया है।
तीन प्रकाशित प्रतियों से — भक्तिभारत (आधार), धर्मसार और ई-स्तुति। सातों छंद तीनों में हैं।
पर्व
