श्री साईं बाबा आरती

śrī sāī bābā āratī

Sai Baba Aarti (Aarti Sai Baba)

समय
4–5 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
✓ संपूर्ण

परिचय

शिरडी के साईं बाबा श्रद्धा और सबूरी के संत हैं — सर्वधर्म समभाव और सेवा के प्रतीक।

स्रोत: शिरडी साईं संस्थान की पारंपरिक काकड़ आरती — रचयिता श्री माधवराव अड़करी / दासगणू परंपरा (मूल मराठी)

आरती (लिरिक्स)

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आरती साईंबाबा, सौख्यदातार जीवा। चरणरजातळी, द्यावा दासां विसावा, भक्तां विसावा॥

हे साईं बाबा, आपकी आरती — आप जीवों को सुख देने वाले हैं; अपने चरणों की रज तले इस दास को विश्राम (शरण) दीजिए, भक्तों को विश्राम दीजिए।

जाळुनियां आनंगा, स्वस्वरूपीं राहे दंग। मुमुक्षु जनां दावी, निज डोळां श्रीरंग, डोळां श्रीरंग॥

काम (अनंग) को भस्म कर जो अपने आत्मस्वरूप में लीन रहते हैं; मुक्ति चाहने वाले भक्तों को अपने ही नेत्रों में श्रीरंग (परमात्मा) का दर्शन कराते हैं।

जया मनीं जैसा भाव, तया तैसा अनुभव। दाविसी दयाघना, ऐसी तुझी ही माव, तुझी ही माव॥

जिसके मन में जैसा भाव होता है, उसे वैसा ही अनुभव होता है; हे करुणा के सागर, ऐसी ही आपकी अद्भुत लीला (माया) है।

तुमचे नाम ध्याता, हरे संसृति व्यथा। अगाध तव करणी, मार्ग दाविसी अनाथा, दाविसी अनाथा॥

आपका नाम स्मरण करते ही संसार के दुख दूर हो जाते हैं; आपकी लीला अगाध है — आप अनाथों को (सही) मार्ग दिखाते हैं।

कलियुगीं अवतार, सगुण ब्रह्म साचार। अवतीर्ण झालासे, स्वामी दत्त दिगंबर, दत्त दिगंबर॥

कलियुग में आप साकार (सगुण) ब्रह्म के सच्चे अवतार हैं; हे स्वामी, आप दत्त दिगंबर (दत्तात्रेय) के रूप में अवतीर्ण हुए हैं।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. हे साईं बाबा, आपकी आरती — आप जीवों को सुख देने वाले हैं; अपने चरणों की रज तले इस दास को विश्राम (शरण) दीजिए, भक्तों को विश्राम दीजिए।
  2. काम (अनंग) को भस्म कर जो अपने आत्मस्वरूप में लीन रहते हैं; मुक्ति चाहने वाले भक्तों को अपने ही नेत्रों में श्रीरंग (परमात्मा) का दर्शन कराते हैं।
  3. जिसके मन में जैसा भाव होता है, उसे वैसा ही अनुभव होता है; हे करुणा के सागर, ऐसी ही आपकी अद्भुत लीला (माया) है।
  4. आपका नाम स्मरण करते ही संसार के दुख दूर हो जाते हैं; आपकी लीला अगाध है — आप अनाथों को (सही) मार्ग दिखाते हैं।
  5. कलियुग में आप साकार (सगुण) ब्रह्म के सच्चे अवतार हैं; हे स्वामी, आप दत्त दिगंबर (दत्तात्रेय) के रूप में अवतीर्ण हुए हैं।

लाभ

  • मन को शांति, धैर्य (सबूरी) और विश्वास (श्रद्धा) प्राप्त होता है।
  • जीवन के कष्ट और चिंताएँ दूर होती हैं।
  • सेवा, करुणा और सद्भाव का भाव जागृत होता है।

कब करें पाठ

गुरुवार कोप्रातः (काकड़) व संध्या (धूप) आरती मेंगुरुपूर्णिमा पर

पाठ विधि

साईं बाबा के समक्ष पुष्प, धूप व दीप अर्पित करें। शिरडी परंपरा में दिन में चार आरतियाँ होती हैं — काकड़ (प्रातः), मध्याह्न, धूप (संध्या) व शेज (रात्रि)। "श्रद्धा" और "सबूरी" के भाव से आरती गाएँ।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराशिरडी साईं बाबा संस्थान — पारंपरिक आरती संग्रह
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री साईं बाबा

Shirdi Sai Baba

शिरडी के साईं बाबा श्रद्धा और सबूरी के संत हैं — सर्वधर्म समभाव और सेवा के प्रतीक।

देवता वर्गश्रद्धा · सबूरी · सेवा · करुणा
संबंधित वारगुरुवार
मुख्य मंत्रॐ साईं नमो नमः
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श्री साईं बाबा आरती — सामान्य प्रश्न

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