श्री साईं बाबा आरती

śrī sāī bābā āratī

Sai Baba Aarti (Aarti Sai Baba — Marathi)

समय
4–5 मिनट
श्लोक/चौपाई
8
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
गुरुवार; गुरु पूर्णिमा; रामनवमी; विजयादशमी
उद्देश्य:गुरु-भक्ति (Devotion to the Guru)शांति (Peace)श्रद्धा-सबुरी (Faith and patience)
✓ संपूर्ण

"आरती साईबाबा, सौख्यदातार जीवा" शिरडी के साईं बाबा की मराठी आरती है। इसमें ध्रुवपद और सात पद हैं। आरती साईं बाबा को "कलियुगीं अवतार, सगुणब्रह्म साचार" — कलियुग का अवतार, साक्षात सगुण ब्रह्म — और "स्वामी दत्त दिगंबर" कहती है, और गुरुवार की वारी (दर्शन-यात्रा) का उल्लेख करती है।

परिचय

शिरडी के साईं बाबा श्रद्धा और सबूरी के संत हैं — सर्वधर्म समभाव और सेवा के प्रतीक।

स्रोत: "आरती साईबाबा" — मराठी आरती; अंतिम पद में छाप "माधवा"

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री साईं बाबा आरती
IASTśrī sāī bābā āratī
देवताश्री साईं बाबा
मूल स्रोत"आरती साईबाबा" — मराठी आरती; अंतिम पद में छाप "माधवा"
शुभ दिनगुरुवार; गुरु पूर्णिमा; रामनवमी; विजयादशमी
पाठ समय4–5 मिनट
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह आरती साईं बाबा को एक गुरु और एक अवतार — दोनों रूपों में गाती है, और हर पद के बाद ध्रुवपद "आरती साईबाबा" लौटता है।

गुरु का स्वरूप (पद 1–3). "जाळुनियां अनंग, स्वस्वरूपीं राहे दंग" — काम को जलाकर वे अपने आत्म-स्वरूप में मग्न रहते हैं और मुमुक्षुओं को अपनी ही आँखों से श्रीरंग (भगवान) का दर्शन कराते हैं। "जया मनीं जैसा भाव, तया तैसा अनुभव" — जिसके मन में जैसा भाव, उसे वैसा अनुभव।

अवतार (पद 4). "कलियुगीं अवतार, सगुणब्रह्म साचार; अवतीर्ण झालासे, स्वामी दत्त दिगंबर" — आरती साईं बाबा को कलियुग में अवतरित सगुण ब्रह्म और दत्त-दिगंबर का रूप कहती है।

गुरुवार (पद 5). "आठा दिवसां गुरुवारी, भक्त करिती वारी" — हर आठवें दिन, गुरुवार को, भक्त दर्शन के लिए वारी (यात्रा) करते हैं। साईं-भक्ति में गुरुवार का महत्व यहीं से दिखता है।

माँग (पद 6–7). भक्त का सबसे बड़ा धन गुरु के चरणों की सेवा है; और अंत में चातक पक्षी की उपमा — जैसे चातक केवल स्वाति का निर्मल जल माँगता है, वैसे ही दीन भक्त गुरु से निज-सुख का जल माँगता है।

आरती (लिरिक्स)

PDF डाउनलोड

आरती साईबाबा। सौख्यदातार जीवा। चरणरजतळीं द्यावा दासां विसावा। भक्तां विसावा॥

(ध्रुवपद) हे जीवों को सुख देने वाले साईं बाबा, आपकी आरती! अपने चरणों की धूल के नीचे दासों को विश्राम दीजिए — भक्तों को विश्राम दीजिए।

जाळुनियां अनंग। स्वस्वरूपीं राहे दंग। मुमुक्षुजनां दावी। निजडोळां श्रीरंग॥

काम (अनंग) को जलाकर आप अपने आत्म-स्वरूप में मग्न रहते हैं; मोक्ष चाहने वालों को आप उनकी अपनी आँखों से श्रीरंग (भगवान) का दर्शन कराते हैं।

जया मनीं जैसा भाव। तया तैसा अनुभव। दाविसी दयाघना। ऐसी तुझी ही माव॥

जिसके मन में जैसा भाव होता है, उसे वैसा ही अनुभव होता है; हे दया के घन, आप ऐसा ही दिखाते हैं — ऐसी आपकी लीला है।

तुमचें नाम ध्यातां। हरे संसृतिव्यथा। अगाध तव करणी। मार्ग दाविसी अनाथा॥

आपके नाम का ध्यान करने से संसार (जन्म-मरण) की व्यथा मिट जाती है; आपकी करनी अगाध है — आप अनाथों को मार्ग दिखाते हैं।

कलियुगीं अवतार। सगुणब्रह्म साचार। अवतीर्ण झालासे। स्वामी दत्त दिगंबर॥

कलियुग में आपका अवतार हुआ है — आप साक्षात सगुण ब्रह्म हैं; हे स्वामी, आप दत्त-दिगंबर के रूप में अवतरित हुए हैं।

आठा दिवसां गुरुवारी। भक्त करिती वारी। प्रभुपद पहावया। भवभय निवारी॥

हर आठवें दिन, गुरुवार को, भक्त वारी (दर्शन-यात्रा) करते हैं — प्रभु के चरणों के दर्शन के लिए, जो संसार का भय दूर करते हैं।

माझा निजद्रव्य ठेवा। तव चरणरजसेवा। मागणें हेंचि आता। तुम्हा देवाधिदेवा॥

मेरा अपना धन और खज़ाना आपके चरणों की धूल की सेवा है; हे देवों के देव, अब आपसे यही माँगता हूँ।

इच्छित दीन चातक। निर्मळ तोय निजसुख। पाजावें माधवा या। सांभाळ आपुली भाक॥

यह दीन चातक (पक्षी की तरह) निर्मल जल — आत्म-सुख — चाहता है; इस माधव को वह पिलाइए, और अपना वचन निभाइए।

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

अर्थ (हिन्दी)

  1. (ध्रुवपद) हे जीवों को सुख देने वाले साईं बाबा, आपकी आरती! अपने चरणों की धूल के नीचे दासों को विश्राम दीजिए — भक्तों को विश्राम दीजिए।
  2. काम (अनंग) को जलाकर आप अपने आत्म-स्वरूप में मग्न रहते हैं; मोक्ष चाहने वालों को आप उनकी अपनी आँखों से श्रीरंग (भगवान) का दर्शन कराते हैं।
  3. जिसके मन में जैसा भाव होता है, उसे वैसा ही अनुभव होता है; हे दया के घन, आप ऐसा ही दिखाते हैं — ऐसी आपकी लीला है।
  4. आपके नाम का ध्यान करने से संसार (जन्म-मरण) की व्यथा मिट जाती है; आपकी करनी अगाध है — आप अनाथों को मार्ग दिखाते हैं।
  5. कलियुग में आपका अवतार हुआ है — आप साक्षात सगुण ब्रह्म हैं; हे स्वामी, आप दत्त-दिगंबर के रूप में अवतरित हुए हैं।
  6. हर आठवें दिन, गुरुवार को, भक्त वारी (दर्शन-यात्रा) करते हैं — प्रभु के चरणों के दर्शन के लिए, जो संसार का भय दूर करते हैं।
  7. मेरा अपना धन और खज़ाना आपके चरणों की धूल की सेवा है; हे देवों के देव, अब आपसे यही माँगता हूँ।
  8. यह दीन चातक (पक्षी की तरह) निर्मल जल — आत्म-सुख — चाहता है; इस माधव को वह पिलाइए, और अपना वचन निभाइए।

लाभ

  • गुरु-भक्ति का भाव — "माझा निजद्रव्य ठेवा, तव चरणरजसेवा": गुरु-चरणों की सेवा ही सबसे बड़ा धन।
  • भाव के अनुसार अनुभव — "जया मनीं जैसा भाव, तया तैसा अनुभव"।
  • गुरुवार के दर्शन और वारी का पाठ (पद 5)।

कब करें पाठ

गुरुवार कोगुरु पूर्णिमा परसाईं मंदिर में आरती के समय

पाठ विधि

साईं बाबा के चित्र के समक्ष दीपक और धूप जलाएँ। पहले ध्रुवपद "आरती साईबाबा, सौख्यदातार जीवा" गाएँ, और हर पद के बाद उसे दोहराएँ। आरती मराठी में है; अर्थ साथ पढ़ने से भाव स्पष्ट होता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराkavitakosh.org — आरती साईबाबा (आधार-पाठ) · marathimati.com — साईबाबाची आरती · marathi.webdunia.com — आरती साईबाबाची
रचयिताअंतिम पद की छाप "माधवा" (प्रकाशित प्रतियों में पूरा नाम नहीं)
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

यह भी देखें

देव परिचय

श्री साईं बाबा

Shirdi Sai Baba

शिरडी के साईं बाबा श्रद्धा और सबूरी के संत हैं — सर्वधर्म समभाव और सेवा के प्रतीक।

देवता वर्गश्रद्धा · सबूरी · सेवा · करुणा
संबंधित वारगुरुवार
मुख्य मंत्रॐ साईं नमो नमः
श्री साईं बाबा के पाठ
सभी पाठ देखें

श्री साईं बाबा आरती — सामान्य प्रश्न

संबंधित पर्व व व्रत

श्री साईं बाबा भक्ति संग्रह

आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ