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लिपि:
॥ श्री ॥
श्री साईं बाबा आरती
आरती · श्री साईं बाबा
पाठ
1
आरती साईंबाबा, सौख्यदातार जीवा। चरणरजातळी, द्यावा दासां विसावा, भक्तां विसावा॥
2
जाळुनियां आनंगा, स्वस्वरूपीं राहे दंग। मुमुक्षु जनां दावी, निज डोळां श्रीरंग, डोळां श्रीरंग॥
3
जया मनीं जैसा भाव, तया तैसा अनुभव। दाविसी दयाघना, ऐसी तुझी ही माव, तुझी ही माव॥
4
तुमचे नाम ध्याता, हरे संसृति व्यथा। अगाध तव करणी, मार्ग दाविसी अनाथा, दाविसी अनाथा॥
5
कलियुगीं अवतार, सगुण ब्रह्म साचार। अवतीर्ण झालासे, स्वामी दत्त दिगंबर, दत्त दिगंबर॥
अर्थ (हिन्दी)
- हे साईं बाबा, आपकी आरती — आप जीवों को सुख देने वाले हैं; अपने चरणों की रज तले इस दास को विश्राम (शरण) दीजिए, भक्तों को विश्राम दीजिए।
- काम (अनंग) को भस्म कर जो अपने आत्मस्वरूप में लीन रहते हैं; मुक्ति चाहने वाले भक्तों को अपने ही नेत्रों में श्रीरंग (परमात्मा) का दर्शन कराते हैं।
- जिसके मन में जैसा भाव होता है, उसे वैसा ही अनुभव होता है; हे करुणा के सागर, ऐसी ही आपकी अद्भुत लीला (माया) है।
- आपका नाम स्मरण करते ही संसार के दुख दूर हो जाते हैं; आपकी लीला अगाध है — आप अनाथों को (सही) मार्ग दिखाते हैं।
- कलियुग में आप साकार (सगुण) ब्रह्म के सच्चे अवतार हैं; हे स्वामी, आप दत्त दिगंबर (दत्तात्रेय) के रूप में अवतीर्ण हुए हैं।
लाभ
- मन को शांति, धैर्य (सबूरी) और विश्वास (श्रद्धा) प्राप्त होता है।
- जीवन के कष्ट और चिंताएँ दूर होती हैं।
- सेवा, करुणा और सद्भाव का भाव जागृत होता है।
कब करें पाठ
गुरुवार को · प्रातः (काकड़) व संध्या (धूप) आरती में · गुरुपूर्णिमा पर
स्रोत
शिरडी साईं बाबा संस्थान — पारंपरिक आरती संग्रह
