संत रविदास आरती

saṃta ravidāsa āratī

Sant Ravidas Aarti (Naam Tero Aarti — Guru Granth Sahib)

समय
3 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
रविदास जयंती (माघ पूर्णिमा); संध्या
उद्देश्य:नाम-भक्ति (Devotion to the Name)आत्म-शुद्धि (Inner purification)शांति (Peace)
✓ संपूर्ण

संत रविदास की आरती उनका अपना शबद है — "नामु तेरो आरती मजनु मुरारे" — जो गुरु ग्रंथ साहिब में राग धनासरी (अंग 694) में संकलित है। इसमें रहाउ और चार पद हैं। यह दीपक-थाल की नहीं, नाम की आरती है: आसन, चंदन, दीपक, बाती, माला और भोग — सब प्रभु का नाम ही है।

परिचय

स्रोत: गुरु ग्रंथ साहिब, राग धनासरी, अंग 694 — भगत रविदास जी का शबद

एक नज़र में

मंत्र / पाठसंत रविदास आरती
IASTsaṃta ravidāsa āratī
मूल स्रोतगुरु ग्रंथ साहिब, राग धनासरी, अंग 694 — भगत रविदास जी का शबद
शुभ दिनरविदास जयंती (माघ पूर्णिमा); संध्या
पाठ समय3 मिनट
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

यह आरती आरती की पूरी सामग्री गिनाती है — और फिर हर एक चीज़ की जगह प्रभु का नाम रख देती है। यही रविदास की निर्गुण भक्ति है।

केंद्रीय वचन (रहाउ). "नामु तेरो आरती मजनु मुरारे; हरि के नाम बिनु झूठे सगल पासारे" — हे मुरारि, आपका नाम ही मेरी आरती और मेरा स्नान है; हरि-नाम के बिना सारे आडंबर झूठे हैं।

पूजा की सामग्री (पद 1–2). नाम ही आसन है, नाम ही चंदन घिसने का पत्थर, नाम ही केसर; नाम ही जल और चंदन — और "नामु तेरा दीवा नामु तेरो बाती नामु तेरो तेलु" — नाम ही दीपक, बाती और तेल है, जिसकी ज्योति से सारा भवन उजियारा हो गया।

क्या अर्पण करूँ (पद 3). "तेरो कीआ तुझहि किआ अरपउ" — जो आपका ही बनाया है, वह आपको क्या अर्पण करूँ? इसलिए नाम ही धागा, नाम ही माला, नाम ही चँवर।

सच्चा भोग (पद 4). अठारह पुराण, अड़सठ तीर्थ और चारों खानियाँ — यह सब संसार का व्यापार है; पर "कहै रविदासु नामु तेरो आरती, सति नामु है हरि भोग तुहारे" — सत्य-नाम ही हरि का भोग है।

आरती (लिरिक्स)

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नामु तेरो आरती मजनु मुरारे॥ हरि के नाम बिनु झूठे सगल पासारे॥ रहाउ॥

(रहाउ) हे मुरारि, आपका नाम ही मेरी आरती है और वही मेरा (तीर्थ-)स्नान; हरि के नाम के बिना सारे आडंबर झूठे हैं।

नामु तेरो आसनो नामु तेरो उरसा नामु तेरा केसरो ले छिटकारे॥ नामु तेरा अंभुला नामु तेरो चंदनो घसि जपे नामु ले तुझहि कउ चारे॥

आपका नाम ही मेरा आसन है, आपका नाम ही (चंदन घिसने का) पत्थर, आपका नाम ही वह केसर जिसे लेकर मैं छिड़कता हूँ; आपका नाम ही जल है, आपका नाम ही चंदन — नाम का जप ही घिसना है, और वही लेकर मैं आपको अर्पित करता हूँ।

नामु तेरा दीवा नामु तेरो बाती नामु तेरो तेलु ले माहि पसारे॥ नाम तेरे की जोति लगाई भइओ उजिआरो भवन सगलारे॥

आपका नाम ही दीपक है, आपका नाम ही बाती, आपका नाम ही वह तेल जो मैं उसमें डालता हूँ; आपके नाम की ज्योति जलाई, तो सारे भवन में उजियारा हो गया।

नामु तेरो तागा नामु फूल माला भार अठारह सगल जूठारे॥ तेरो कीआ तुझहि किआ अरपउ नामु तेरा तुही चवर ढोलारे॥

आपका नाम ही धागा है, नाम ही फूलों की माला; (अर्पण के लिए) अठारह भार वनस्पति भी सब जूठी है; जो आपका ही बनाया है, वह आपको क्या अर्पण करूँ? आपका नाम ही वह चँवर है जो मैं डुलाता हूँ।

दस अठा अठसठे चारे खाणी इहै वरतणि है सगल संसारे॥ कहै रविदासु नामु तेरो आरती सति नामु है हरि भोग तुहारे॥

अठारह (पुराण), अड़सठ (तीर्थ) और (सृष्टि की) चारों खानियाँ — यही सारे संसार का व्यवहार है; रविदास कहते हैं — आपका नाम ही आरती है, और सत्य-नाम ही, हे हरि, आपका भोग है।

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अर्थ (हिन्दी)

  1. (रहाउ) हे मुरारि, आपका नाम ही मेरी आरती है और वही मेरा (तीर्थ-)स्नान; हरि के नाम के बिना सारे आडंबर झूठे हैं।
  2. आपका नाम ही मेरा आसन है, आपका नाम ही (चंदन घिसने का) पत्थर, आपका नाम ही वह केसर जिसे लेकर मैं छिड़कता हूँ; आपका नाम ही जल है, आपका नाम ही चंदन — नाम का जप ही घिसना है, और वही लेकर मैं आपको अर्पित करता हूँ।
  3. आपका नाम ही दीपक है, आपका नाम ही बाती, आपका नाम ही वह तेल जो मैं उसमें डालता हूँ; आपके नाम की ज्योति जलाई, तो सारे भवन में उजियारा हो गया।
  4. आपका नाम ही धागा है, नाम ही फूलों की माला; (अर्पण के लिए) अठारह भार वनस्पति भी सब जूठी है; जो आपका ही बनाया है, वह आपको क्या अर्पण करूँ? आपका नाम ही वह चँवर है जो मैं डुलाता हूँ।
  5. अठारह (पुराण), अड़सठ (तीर्थ) और (सृष्टि की) चारों खानियाँ — यही सारे संसार का व्यवहार है; रविदास कहते हैं — आपका नाम ही आरती है, और सत्य-नाम ही, हे हरि, आपका भोग है।

लाभ

  • नाम-भक्ति का सार — "नामु तेरो आरती मजनु मुरारे"।
  • आडंबर से मुक्त पूजा का भाव — "हरि के नाम बिनु झूठे सगल पासारे"।
  • रविदास जयंती और रविदासिया समाज की संगत में गाई जाने वाली आरती।

कब करें पाठ

रविदास जयंती (माघ पूर्णिमा) परसंध्या-नाम-स्मरण के समयसंगत और कीर्तन में

पाठ विधि

यह आरती थाल और दीपक की नहीं, नाम की आरती है — इसलिए इसे शांत मन से, अर्थ समझते हुए गाया जाता है। रहाउ ("नामु तेरो आरती मजनु मुरारे, हरि के नाम बिनु झूठे सगल पासारे") हर पद के बाद दोहराया जाता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराश्री गुरु ग्रंथ साहिब, राग धनासरी, अंग 694 — भगत रविदास जी · dekho-ji.com — आरती (गुरबाणी), गुरमुखी व देवनागरी (आधार-पाठ) · bharatdiscovery.org — नामु तेरो आरती भजनु मुरारे (रैदास) · drikpanchang.com — आरती श्री रविदास जी की
रचयितासंत रविदास (अंतिम पद की छाप "कहै रविदासु")
अंतिम अद्यतनसितंबर 2026

संत रविदास आरती — सामान्य प्रश्न