समय
4 मिनट
श्लोक/चौपाई
5
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
गुरु नानक जयंती (कार्तिक पूर्णिमा); संध्या
उद्देश्य:नाम-भक्ति (Devotion to the Name)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual growth)शांति (Peace)
✓ संपूर्ण
गुरु नानक देव जी की आरती "गगन मै थालु, रवि चंदु दीपक बने" गुरु ग्रंथ साहिब में राग धनासरी, अंग 663 पर है। इसमें चार पद और रहाउ हैं। यह थाल-दीपक की आरती नहीं — पूरी सृष्टि ही आरती है: आकाश थाल, सूर्य-चंद्र दीपक, तारे मोती, और हवा चँवर डुलाती है।
FAQ
गुरु नानक देव आरती — सामान्य प्रश्न
राग धनासरी में, "धनासरी महला १ आरती" शीर्षक से, अंग 663 पर। इसमें चार पद और रहाउ हैं।
आकाश ही थाल है — "गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने, तारिका मंडल जनक मोती": आकाश थाल, सूर्य-चंद्र दीपक और तारे मोती हैं। गुरु नानक देव जी कहते हैं कि प्रभु की आरती पूरी सृष्टि कर रही है।
अंतिम पद में गुरु जी स्वयं को "सारिंग" — सारंग या चातक पक्षी — कहते हैं, जो केवल वर्षा की बूँद के लिए प्यासा रहता है: "क्रिपा जलु देहि नानक सारिंग कउ, होइ जा ते तेरै नामि वासा"।
श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अंग 663 से — dekho-ji.com पर गुरमुखी-देवनागरी पाठ (आधार) — और हिन्दूइज़्म FAQ की प्रति से मिलाकर। चारों पद और रहाउ तीनों में शब्दशः हैं।
पर्व
