श्री गुरु नानक देव आरती
śrī guru nānaka deva āratī
Guru Nanak Dev Aarti (Gagan Mai Thaal)
परिचय
स्रोत: गुरु ग्रंथ साहिब — गुरु नानक देव रचित आरती
उद्भव / पृष्ठभूमि
श्री गुरु नानक देव जी सिख धर्म के प्रथम गुरु व "इक ओंकार" (एक निराकार परमात्मा) के उपदेशक हैं। यह प्रसिद्ध आरती "गगन मै थालु" स्वयं गुरु नानक देव जी ने जगन्नाथ पुरी में रचकर समस्त सृष्टि को ही परमात्मा की आरती बताया। यह गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व) व नित्य कीर्तन में गाई जाती है।
आरती (लिरिक्स)
गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने, तारिका मंडल जनक मोती। धूपु मलआनलो पवणु चवरो करे, सगल बनराइ फूलंत जोती॥
आकाश ही थाल है, सूर्य व चन्द्र उसमें दीपक हैं, तारों का समूह मानो मोती हैं; मलयाचल की पवन धूप है, वायु चँवर डुला रही है और समस्त वनस्पति पुष्प-रूप ज्योति अर्पित कर रही है।
कैसी आरती होइ, भव खंडना तेरी आरती। अनहता सबद वाजंत भेरी॥
हे भव (जन्म-मरण) का नाश करने वाले! आपकी कैसी अद्भुत आरती हो रही है — अनहद नाद (अनाहत शब्द) ही नगाड़े-भेरी की भाँति बज रहा है।
सहस तव नैन, नन नैन हैं तोहि कउ, सहस मूरति नना एक तोही। सहस पद बिमल नन एक पद, गंध बिनु सहस तव गंध इव चलत मोही॥
आपके सहस्र (अनंत) नेत्र हैं, फिर भी निराकार रूप में कोई नेत्र नहीं; आपके सहस्र रूप हैं, फिर भी आप एक ही हैं — यह विराट रहस्य मन को मोह लेता है।
सभ महि जोति जोति है सोइ, तिस कै चानणि सभ महि चानणु होइ। गुर साखी जोति परगटु होइ॥
सबके भीतर वही एक ज्योति (परमात्मा) है, उसी के प्रकाश से सबमें प्रकाश है; गुरु के उपदेश (साक्षी) से ही वह ज्योति प्रकट होती है।
गुरु नानक की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। नाम-ज्योति वह पावे, गुरु-कृपा पावे॥
जो भक्त श्रद्धा से गुरु नानक देव की यह आरती गाता है, वह नाम-ज्योति (आत्म-प्रकाश) तथा गुरु-कृपा प्राप्त करता है।
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अर्थ (हिन्दी)
- आकाश ही थाल है, सूर्य व चन्द्र उसमें दीपक हैं, तारों का समूह मानो मोती हैं; मलयाचल की पवन धूप है, वायु चँवर डुला रही है और समस्त वनस्पति पुष्प-रूप ज्योति अर्पित कर रही है।
- हे भव (जन्म-मरण) का नाश करने वाले! आपकी कैसी अद्भुत आरती हो रही है — अनहद नाद (अनाहत शब्द) ही नगाड़े-भेरी की भाँति बज रहा है।
- आपके सहस्र (अनंत) नेत्र हैं, फिर भी निराकार रूप में कोई नेत्र नहीं; आपके सहस्र रूप हैं, फिर भी आप एक ही हैं — यह विराट रहस्य मन को मोह लेता है।
- सबके भीतर वही एक ज्योति (परमात्मा) है, उसी के प्रकाश से सबमें प्रकाश है; गुरु के उपदेश (साक्षी) से ही वह ज्योति प्रकट होती है।
- जो भक्त श्रद्धा से गुरु नानक देव की यह आरती गाता है, वह नाम-ज्योति (आत्म-प्रकाश) तथा गुरु-कृपा प्राप्त करता है।
लाभ
- मन को शांति, ज्ञान-ज्योति व आत्म-बोध की प्राप्ति होती है।
- अहंकार दूर होकर समता व भक्ति का भाव जागता है।
- गुरु-कृपा व आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
श्रद्धापूर्वक मन को एकाग्र कर "गगन मै थालु" आरती का गायन करें; इसमें समस्त सृष्टि को ही परमात्मा की आरती मानकर निराकार प्रभु का स्मरण किया जाता है। प्रकाश पर्व पर इसका विशेष महत्व है।
