पूर्णिमा व्रत कथा
पाठ
व्रत नियम
कौन रखे: सभी आयु के स्त्री-पुरुष (श्रद्धानुसार)
कब: प्रत्येक माह की पूर्णिमा; चंद्रोदय पर पारण
आहार नियम: दिनभर फलाहार/सात्विक आहार; चंद्र दर्शन व अर्घ्य के बाद भोजन; तामसिक भोजन वर्जित
पूजन सामग्री
विष्णु/सत्यनारायण चित्र · जल का कलश · सफेद पुष्प व तुलसीदल · खीर (चंद्र अर्घ्य हेतु) · दीप व धूप · फल
पूजन विधि
- पूर्णिमा प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु/सत्यनारायण का पूजन कर तुलसीदल अर्पित करें।
- दिनभर उपवास रख हरि-नाम स्मरण करें।
- संध्या/रात्रि चंद्रोदय पर चंद्रदेव को जल व खीर का अर्घ्य दें।
- विष्णु आरती कर प्रसाद ग्रहण करें व व्रत का पारण करें।
व्रत कथा
साहूकार की दो बेटियों की कथा
एक साहूकार की दो बेटियाँ थीं। दोनों पूर्णिमा का व्रत रखती थीं — बड़ी बेटी विधि से पूरा व्रत करती थी, पर छोटी बेटी अधूरा ही करती थी। इसका फल यह हुआ कि छोटी बेटी की संतान जन्म लेते ही मर जाती थी।
दुखी होकर उसने पंडितों से कारण पूछा। पंडितों ने बताया कि पूर्णिमा का अधूरा व्रत करने से ऐसा होता है, और यदि वह विधि से पूरा व्रत करेगी तो संतान जीवित रहेगी। छोटी बेटी ने विधि से पूर्णिमा का व्रत किया। उसे पुत्र हुआ, पर वह भी शीघ्र मर गया।
तब छोटी बेटी ने बच्चे को पीढ़े पर लिटाकर ऊपर कपड़ा ढक दिया और बड़ी बहन को बुलाकर उसे वही पीढ़ा बैठने को दिया। बड़ी बहन के बैठते ही उसका घाघरा बच्चे को छू गया और बच्चा जीवित होकर रोने लगा। बड़ी बहन बोली — तू मुझे कलंक लगाना चाहती थी! छोटी बहन ने कहा — यह तो पहले से मरा हुआ था, तेरे पुण्य से जीवित हुआ है। उसके बाद उसने नगर में ढिंढोरा पिटवा दिया कि सब पूर्णिमा का व्रत करें, और पूरा व्रत करें।
लाभ
- मन की शांति व आरोग्य।
- सुख-समृद्धि व सौभाग्य।
- विष्णु व चंद्रदेव की कृपा।
स्रोत
रचयिता: लोक-परंपरा. aartigyan.com — शरद पूर्णिमा व्रत कथा (साहूकार की दो पुत्रियाँ) · marwaripuja.com — पूर्णिमा का व्रत (मारवाड़ी कथा) · raftaar.in — शरद पूर्णिमा व्रत कथा
