पूर्णिमा व्रत कथा
पाठ
व्रत नियम
कौन रखे: सभी आयु के स्त्री-पुरुष (श्रद्धानुसार)
कब: प्रत्येक माह की पूर्णिमा; चंद्रोदय पर पारण
आहार नियम: दिनभर फलाहार/सात्विक आहार; चंद्र दर्शन व अर्घ्य के बाद भोजन; तामसिक भोजन वर्जित
पूजन सामग्री
विष्णु/सत्यनारायण चित्र · जल का कलश · सफेद पुष्प व तुलसीदल · खीर (चंद्र अर्घ्य हेतु) · दीप व धूप · फल
पूजन विधि
- पूर्णिमा प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु/सत्यनारायण का पूजन कर तुलसीदल अर्पित करें।
- दिनभर उपवास रख हरि-नाम स्मरण करें।
- संध्या/रात्रि चंद्रोदय पर चंद्रदेव को जल व खीर का अर्घ्य दें।
- विष्णु आरती कर प्रसाद ग्रहण करें व व्रत का पारण करें।
व्रत कथा
पूर्णिमा माहात्म्य
पुराणों में वर्णित है कि एक निर्धन किंतु श्रद्धालु व्यक्ति नियमित रूप से पूर्णिमा का व्रत व विष्णु पूजन करता था। उसकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसके दुख दूर किए और उसे सुख-समृद्धि प्रदान की।
पूर्णिमा को चंद्रदेव की किरणें अमृतमयी मानी जाती हैं; शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर को चाँदनी में रखकर ग्रहण करने की परंपरा इसी विश्वास पर आधारित है।
कथा का सार यह है कि श्रद्धा से किया गया पूर्णिमा व्रत, विष्णु व चंद्र की कृपा से, मन की शांति, आरोग्य व समृद्धि प्रदान करता है।
लाभ
- मन की शांति व आरोग्य।
- सुख-समृद्धि व सौभाग्य।
- विष्णु व चंद्रदेव की कृपा।
स्रोत
रचयिता: पुराण परंपरा. पुराण परंपरा
