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लिपि:
॥ श्री ॥

पद्मिनी एकादशी

व्रत कथा · श्री विष्णु

पाठ

व्रत कथा

राजा कार्तवीर्य व रानी की तपस्या

राजा कार्तवीर्य (हैहयवंशी) व उनकी रानी प्रमदा संतान-सुख से वंचित थे। रानी ने संतान-प्राप्ति हेतु दस हज़ार वर्ष तक कठोर तप किया, किंतु कोई फल न मिला।

निराश रानी ने देवी अनसूया के पास जाकर उपाय पूछा। देवी ने उन्हें अधिक मास की पद्मिनी एकादशी का व्रत रात्रि-जागरण सहित करने की प्रेरणा दी।

व्रत का फल

रानी प्रमदा ने श्रद्धापूर्वक यह दुर्लभ व्रत किया, जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें कार्तवीर्य नामक तेजस्वी पुत्र का वरदान दिया — जो श्रीहरि के अतिरिक्त सबके लिए अजेय था।

यही कार्तवीर्य (सहस्रार्जुन) आगे चलकर इतना पराक्रमी हुआ कि उसने बलशाली रावण तक को बंदी बना लिया। इस प्रकार पद्मिनी एकादशी अपार पुण्य व मनोकामना-पूर्ति देने वाली मानी जाती है।

लाभ

  • दुर्लभ व अपार पुण्य
  • मनोकामना-पूर्ति (विशेषकर संतान-सुख)
  • तप-यज्ञों से श्रेष्ठ फल; अंत में विष्णुलोक

स्रोत

पद्मिनी एकादशी माहात्म्य — राजा कार्तवीर्य व रानी प्रमदा प्रसंग · एकादशी माहात्म्य परंपरा

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