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लिपि:
॥ श्री ॥

कामिका एकादशी

व्रत कथा · श्री विष्णु

पाठ

व्रत कथा

तुलसी व दीप का माहात्म्य

पुराणों के अनुसार कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु का तुलसीदल, पुष्प, धूप व दीप से पूजन करने का विशेष विधान है। कहा गया है कि भगवान विष्णु को रत्न, मोती व स्वर्ण-आभूषणों की अपेक्षा तुलसीदल अधिक प्रिय है।

इस दिन विष्णु के समक्ष दीपदान करने वाले भक्त पर भगवान की विशेष कृपा होती है, और उसके पितरों का भी उद्धार होता है।

व्रत का फल

शास्त्रों में वर्णित है कि कामिका एकादशी की कथा सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ के समान फल मिलता है। इस व्रत का पुण्य ग्रहण-काल में पवित्र नदियों के स्नान व भूमिदान से भी अधिक बताया गया है।

यह व्रत ब्रह्महत्या जैसे महापापों तक का नाश करने वाला तथा अंत में स्वर्ग व विष्णुलोक प्रदान करने वाला माना गया है।

लाभ

  • कथा-श्रवण मात्र से वाजपेय यज्ञ के तुल्य पुण्य
  • समस्त पापों का नाश व पितरों का उद्धार
  • अंत में विष्णुलोक की प्राप्ति

स्रोत

कामिका एकादशी माहात्म्य (ब्रह्मवैवर्त पुराण परंपरा) · एकादशी माहात्म्य — तुलसी व दीपदान प्रसंग

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