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लिपि:
॥ श्री ॥
ॐ आशुतोषाय नमः
मंत्र · श्री शिव
पाठ
1
ॐ आशुतोषाय नमः॥
अर्थ (हिन्दी)
- आशुतोष शिव को नमस्कार। जो शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं, जिन्हें सामग्री नहीं भाव चाहिए — उन भोले महादेव को मैं प्रणाम करता हूँ।
लाभ
- परंपरा में इसे शीघ्र शिव-कृपा की कामना से जोड़ा जाता है।
- सरल साधन व सच्चे भाव से उपासना का भाव जगाने वाला माना जाता है।
- निराशा या "मेरी नहीं सुनी जाएगी" के भाव में आश्वासन देने वाला कहा जाता है।
- शिव-भजनों व लोक-भक्ति में सर्वाधिक प्रिय संबोधनों में से एक है।
कब करें पाठ
प्रातः व संध्या नित्य पूजा में · सोमवार व प्रदोष काल में · महाशिवरात्रि व श्रावण मास में · किसी मनोकामना के संकल्प के साथ
स्रोत
भक्ति-परंपरा में प्रचलित शिव संबोधन "आशुतोष" (आशु + तोष) · शिव के स्वभाव-वर्णन संबंधी पारंपरिक पुराण कथाएँ · नोट: यह नाम शिव अष्टोत्तर शतनामावली व शिव शतनामावली — दोनों सूचियों में नहीं मिलता
