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लिपि:
॥ श्री ॥
ॐ भैरवाय नमः
मंत्र · श्री शिव
पाठ
1
ॐ भैरवाय नमः॥
अर्थ (हिन्दी)
- भैरव को नमस्कार। शिव के उस उग्र रक्षक स्वरूप को, जिनकी गर्जना से भय स्वयं भयभीत हो जाता है और जो क्षेत्रपाल बनकर भक्तों की रक्षा करते हैं — उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।
लाभ
- परंपरा में इसे भय, शत्रु-बाधा व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा से जोड़ा जाता है।
- क्षेत्रपाल स्वरूप होने से गृह व स्थान की रक्षा हेतु जप प्रचलित है।
- आकस्मिक संकट व यात्रा-भय में स्मरण किया जाता है।
- शक्तिपीठ उपासना में भैरव-स्मरण अनिवार्य माना जाता है।
कब करें पाठ
रविवार व मंगलवार को · कालाष्टमी व भैरव अष्टमी पर · रात्रि काल में — भैरव उपासना का पारंपरिक समय · भय, संकट या यात्रा आरंभ के समय
स्रोत
भैरव उपासना परंपरा — अष्ट भैरव व क्षेत्रपाल स्वरूप · शिव पुराण — भैरव प्राकट्य प्रसंग · नोट: "भैरवाय" शिव अष्टोत्तर शतनामावली की 108-नाम सूची में नहीं आता; वह सूची शिव के स्वरूप-नामों की है
