ॐ भैरवाय नमः

oṃ bhairavāya namaḥ

Bhairav Mantra (Om Bhairavaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
रविवार, मंगलवार व कालाष्टमी
उद्देश्य:रक्षा (Protection)भय नाश (Fearlessness)संकट मोचन (Relief from Crisis)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ भैरवाय नमः शिव के उग्र रक्षक स्वरूप भैरव का नाम-मंत्र है। नाम की व्युत्पत्ति “भय” + “रव” से बताई जाती है — जिनकी गर्जना से भय स्वयं भयभीत हो जाए। भैरव को क्षेत्रपाल भी कहा जाता है। यह कालभैरव मंत्र से भिन्न है; यहाँ केंद्र सामान्य व अष्ट भैरव स्वरूप है।

परिचय

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

स्रोत: भैरव उपासना परंपरा — शिव का उग्र रक्षक स्वरूप

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ भैरवाय नमः
IASToṃ bhairavāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री शिव
मूल स्रोतभैरव उपासना परंपरा — शिव का उग्र रक्षक स्वरूप
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष माला
शुभ दिनरविवार, मंगलवार व कालाष्टमी
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

भैरव शिव का उग्र और रक्षक स्वरूप है। नाम की एक व्युत्पत्ति "भय" + "रव" से बताई जाती है — जिनकी गर्जना से भय स्वयं भयभीत हो जाता है; दूसरी व्युत्पत्ति में "भरण, रमण, वमन" — पालन, रमण और संहार — तीनों कार्यों का भाव लिया जाता है। श्वान (कुत्ता) उनका वाहन है और यही उनकी सबसे परिचित पहचान है।

परंपरा में भैरव के आठ प्रमुख रूप — अष्ट भैरव — माने जाते हैं, जिनमें कालभैरव प्रधान हैं। भैरव को क्षेत्रपाल भी कहा जाता है, अर्थात् क्षेत्र या स्थान का रक्षक; इसीलिए अनेक शिव व शक्ति मंदिरों में भैरव की स्थापना द्वारपाल-रूप में मिलती है। शाक्त परंपरा में शक्तिपीठों के साथ भैरव का युग्म अनिवार्य माना जाता है। यह नाम-मंत्र भैरव के सामान्य स्वरूप का है; कालभैरव के विशिष्ट मंत्र का पृष्ठ अलग है।

मंत्र

PDF डाउनलोड

ॐ भैरवाय नमः॥

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

उच्चारण (Pronunciation)

ॐ भैरवाय नमः॥

oṃ bhairavāya namaḥ ||

Om Bhairavaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "भै" द्विस्वर है (भ् + ऐ) और महाप्राण भी — इसे "बै" या "भे" न बनाएँ। "रवाय" में "आ" दीर्घ। पूरा रूप "भै-र-वाय न-मः"। परंपरा में इस मंत्र को दृढ़ व निर्भय स्वर में जपा जाता है — डरकर या झिझककर नहीं, क्योंकि यह भय-नाश का मंत्र माना जाता है।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
भयडर
रवगर्जना, नाद
भैरवायभैरव (शिव के उग्र रक्षक स्वरूप) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. भैरव को नमस्कार। शिव के उस उग्र रक्षक स्वरूप को, जिनकी गर्जना से भय स्वयं भयभीत हो जाता है और जो क्षेत्रपाल बनकर भक्तों की रक्षा करते हैं — उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे भय, शत्रु-बाधा व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा से जोड़ा जाता है।
  • क्षेत्रपाल स्वरूप होने से गृह व स्थान की रक्षा हेतु जप प्रचलित है।
  • आकस्मिक संकट व यात्रा-भय में स्मरण किया जाता है।
  • शक्तिपीठ उपासना में भैरव-स्मरण अनिवार्य माना जाता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला

उत्तम समय: रात्रि काल, विशेषतः कालाष्टमी

जप का उत्तम समय

रविवार व मंगलवार कोकालाष्टमी व भैरव अष्टमी पररात्रि काल में — भैरव उपासना का पारंपरिक समयभय, संकट या यात्रा आरंभ के समय

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

भैरव के चित्र या विग्रह के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाकर, रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करें। परंपरा में रात्रि काल को भैरव उपासना का समय बताया जाता है। श्वान को भोजन कराना भैरव-सेवा मानी जाती है, क्योंकि वे भैरव का वाहन हैं। जप के समय स्वर दृढ़ व निर्भय रखने पर विशेष बल दिया जाता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराभैरव उपासना परंपरा — अष्ट भैरव व क्षेत्रपाल स्वरूप · शिव पुराण — भैरव प्राकट्य प्रसंग · नोट: "भैरवाय" शिव अष्टोत्तर शतनामावली की 108-नाम सूची में नहीं आता; वह सूची शिव के स्वरूप-नामों की है
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शिव

Lord Shiva

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

देवता वर्गसंहार · योग · ध्यान · कल्याण · मोक्ष
वाहननंदी (वृषभ)
संबंधित वारसोमवार
मुख्य मंत्रॐ नमः शिवाय
सभी पाठ देखें

ॐ भैरवाय नमः — सामान्य प्रश्न

श्री शिव भक्ति संग्रह

आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ