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लिपि:
॥ श्री ॥

श्री चामुंडा माता आरती

आरती · माँ दुर्गा

पाठ

1

जय चामुंडा माता, मैया जय चामुंडा माता। भक्तन की रखवाली, तू दुख की हर्ता॥

2

चण्ड-मुण्ड संहारे, नाम चामुंडा पाया। खड्ग-त्रिशूल धारिणि, उग्र रूप दिखाया॥

3

सप्तशती में वर्णित, महिमा तेरी न्यारी। दुष्ट-दलन कर माता, करती जग-रखवारी॥

4

जो जन तुमको ध्याता, भय-संकट नाशे। रोग-दोष सब मिटते, सुख-सम्पति आशे॥

5

चामुंडा माँ की आरती, जो जन श्रद्धा गावे। भय-संकट सब मिटते, अभय-पद वह पावे॥

अर्थ (हिन्दी)

  1. हे चामुंडा माता, आपकी जय हो! आप भक्तों की रक्षक तथा दुःख हरने वाली हैं।
  2. चण्ड व मुण्ड का संहार करने से आपने "चामुंडा" नाम पाया; खड्ग व त्रिशूल धारण कर आपने उग्र रूप दिखाया।
  3. दुर्गा सप्तशती में आपकी अनुपम महिमा वर्णित है; हे माता, दुष्टों का दमन कर आप जगत की रक्षा करती हैं।
  4. जो भक्त आपका ध्यान करता है, उसके भय-संकट नष्ट हो जाते हैं; रोग-दोष मिट जाते हैं और सुख-सम्पत्ति की प्राप्ति होती है।
  5. जो भक्त श्रद्धा से चामुंडा माँ की यह आरती गाता है, उसके समस्त भय-संकट मिट जाते हैं और वह अभय-पद प्राप्त करता है।

लाभ

  • भय, शत्रु व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
  • संकट, रोग व बाधाओं का नाश होता है।
  • साहस, शक्ति व आत्मबल में वृद्धि होती है।

कब करें पाठ

नवरात्रि व अष्टमी को · मंगलवार व शुक्रवार को · संध्या पूजा में

स्रोत

रचयिता: पारंपरिक. पारंपरिक हिन्दू आरती संग्रह

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