श्री चामुण्डा माता आरती
पाठ
ॐ जय चामुण्डा माता, मैया जय चामुण्डा माता। शरण आए जो तेरे, सब कुछ पा जाता॥
चण्ड मुण्ड दो राक्षस, हुए है बलशाली। उनको तुमने मारा, क्रोध दृष्टि डाली॥
चौसठ योगिनी आकर, तांडव नृत्य करे। बावन भैरो झूमे, विपदा आन हरे॥
शक्ति धाम कहाती, पीछे शिव मंदर। ब्रह्मा विष्णु नारद, मंत्र जपे अंदर॥
सिंहराज यहां रहते, घंटा ध्वनि बाजे। निर्मल धारा जल की, वंडेर नदी साजे॥
क्रोध रूप में खप्पर, खाली नहीं रहता। शांत रूप जो ध्यावे, आनंद भर देता॥
हनुमत बाला योगी, ठाढ़े बलशाली। कारज पूरण करती, दुर्गा महाकाली॥
रिद्धि सिद्धि देकर, जन के पाप हरे। शरणागत जो होता, आनंद राज करे॥
शुभ गुण मंदिर वाली, 'ओम' कृपा कीजे। दुख जीवन के संकट, आकर हर लीजे॥
अर्थ (हिन्दी)
- (टेक) हे चामुण्डा माता, हे मैया, तेरी जय हो! जो तेरी शरण में आता है, वह सब कुछ पा जाता है।
- चण्ड और मुण्ड — दो राक्षस बड़े बलशाली हुए; तुमने उन पर क्रोध-दृष्टि डालकर उन्हें मार डाला।
- चौंसठ योगिनियाँ आकर तांडव नृत्य करती हैं; बावन भैरव झूमते हैं और विपदा हरते हैं।
- (यह स्थान) शक्ति-धाम कहलाता है, पीछे शिव का मंदिर है; उसके भीतर ब्रह्मा, विष्णु और नारद मंत्र जपते हैं।
- यहाँ सिंहराज रहते हैं, घंटों की ध्वनि बजती है; जल की निर्मल धारा वाली वंडेर नदी शोभा पाती है।
- क्रोध-रूप में (तुम्हारा) खप्पर कभी खाली नहीं रहता; और जो शांत-रूप का ध्यान करता है, उसे तुम आनंद से भर देती हो।
- बलशाली हनुमान और बाल-योगी (तुम्हारे द्वार पर) खड़े हैं; दुर्गा महाकाली (भक्तों के) काम पूरे करती हैं।
- ऋद्धि-सिद्धि देकर तुम लोगों के पाप हरती हो; जो शरण में आता है, वह आनंद से राज करता है।
- हे शुभ गुणों के मंदिर वाली माँ, "ओम" पर कृपा कीजिए; आकर जीवन के दुख और संकट हर लीजिए।
लाभ
- रक्षा और संकट-निवारण — "शरण आए जो तेरे, सब कुछ पा जाता"।
- चण्ड-मुण्ड के वध का स्मरण (पद 1)।
- उग्र और शांत — माँ के दोनों रूपों का ध्यान (पद 5)।
कब करें पाठ
नवरात्रि में · मंगलवार को · संकट के समय
स्रोत
रचयिता: अंतिम पद में "'ओम'" (छाप जैसा; प्रतियों में और जानकारी नहीं). nakshatravichar.com — चामुण्डा माता की आरती (आधार-पाठ) · bhaktibharat.com — आरती: श्री चामुण्डा माता · e-stuti.blogspot.com — जय चामुंडा माता
